शुभ या अशुभ मुहूर्त नहीं, कार्य होते हैं शुभ अथवा अशुभ

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सीताराम गुप्ता,
दिल्ली

     अधिकांश लोगों का मत है कि किसी भी कार्य को सही अथवा शुभ मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए क्योंकि शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों में ही अपेक्षित पूर्ण सफलता संभव है अन्यथा नहीं। मोटर गाड़ी या प्राॅपर्टी खरीदनी हो, मकान बनवाना प्रारंभ करना हो, गृह प्रवेश करना हो अथवा विवाहादि अन्य कोई भी मांगलिक कार्य हो लोग प्रायः शुभ मुहूर्त में ही ये कार्य सम्पन्न करते हैं। अब तो बच्चों को भी मनचाहे महूर्त में पैदा करवाने का प्रचलन प्रारंभ हो गया है। बारह दिसंबर सन् 2012 के बारह बजे का तथाकथित शुभ मुहूर्त आप भूले नहीं होंगे जब पूरी दुनिया में अपरिपक्व नवजात शिशुओं को निर्दयतापूर्वक इस संसार में लाने के प्रयास किए जा रहे थे। ये बाज़ारवाद की पराकाष्ठा है जहाँ अज्ञान व अंधविश्वास फैला कर लागों का बेतहाशा शोषण किया जा रहा है।

     किसी भी कार्य को करने के लिए शुभ मुहूर्त, शुभ घड़ी, शुभ दिन अथवा शुभ महीना कौन सा होगा इसका पूरा शास्त्र हम लोगों ने रच डाला है लेकिन देखने में ये भी आता है कि एक समय विशेष पर शुभ मुहूर्त में जहाँ अनेकानेक मांगलिक कार्य सम्पन्न हो रहे होते हैं वहीं उन्हीं क्षणों में दूसरी ओर रोग-शोक, मृत्यु, दुर्घटनाएँ, उत्पीड़न, शोषण आदि के असंख्य दृष्य भी सर्वत्र दिखलाई पड़ते हैं। कहीं परीक्षा परिणाम घोषित हो रहा है जिसमें कोई पास तो कोई फेल हो रहा है। ऐसी स्थिति में हम प्रायः कह देते हैं कि ये अपने-अपने कर्मों का फल है। जैसा कर्म वैसा परिणाम। ठीक है। यदि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भोगना ही है, कर्म के अनुसार परिणाम मिलना ही है तो फिर महत्त्व कर्म का हुआ या मुहूर्त का?

     शुभ मुहूर्त वास्तव में है क्या? शुभ मुहूर्त वास्तव में कार्य को प्रारंभ करने का उचित समय है। यह समय प्रबंधन का ही एक स्वरूप है ताकि कार्य समय पर सम्पन्न हो सके और निर्विघ्न रूप से सम्पन्न हो सके। हमारे संसाधन और प्रयास निरर्थक न हो जाएँ। अब जीवन के दूसरे महत्त्वपूर्ण पक्ष को भी देखिए। आपका किसी महत्त्वपूर्ण या मनचाहे कोर्स में प्रवेश हो जाता है अथवा नौकरी मिल जाती है तो आपको एक निर्दिष्ट समय पर ही जाना पड़ता है अन्यथा आपका प्रवेश या नौकरी रद्द कर दी जाती है। क्या ऐसी स्थितियों में भी आप शुभ मुहूर्त के चक्कर में पड़ेंगे? हम जानते हैं कि यदि ये अवसर हाथ से निकल गया तो दोबारा नहीं मिलने वाला। प्रायः यही पढ़ाई अथवा नौकरी हमारे जीवन में सुख-समृद्धि लाती है तथा हमारे जीवन को अर्थ व गुणवत्ता प्रदान करने में सहायक व सक्षम होती है। यहाँ अवसर महत्त्वपूर्ण हो जाता है न कि कोई मुहूर्त विशेष।

     यदि हम ध्यानपूर्वक देखें या चिंतन करें तो ज्ञात होता है कि मुहूर्त शुभ या अशुभ नहीं होता शुभ या अशुभ होता है कार्य। भयानक मानवीय दुर्घटना, रोग-शोक, बाढ़, भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं में जन-माल की हानि, किन्हीं भी कारणों से प्रियजनों का वियोग जिन क्षणों में घटित होते हैं वे क्षण स्वयमेव अशुभ बन जाते हैं जबकि वे क्षण जिनमें कोई सुखद संयोग, धन लाभ, अनुकूल संधि, संतान प्राप्ति, विवाह योग्य जातकों का विवाह, रोग मुक्ति के बाद स्वास्थ्य लाभ अथवा अन्य किसी भी प्रकार का संतुष्टि प्रदान करने वाला कार्य घटित होता है या क्षण जीवन में अवतरित होता है वह क्षण शुभ क्षण व उस क्षण सम्पन्न किया जाने वाला कार्य शुभ कार्य हो जाता है।

     हिन्दी भाषा के श्रेष्ठ कवि, साहित्य शिरोमणि संत तुलसीदास का जन्म तथाकथित अशुभ नक्षत्र में होने के कारण उनके माता-पिता ने उनका त्याग कर दिया गया था। एक दासी के द्वारा उनका पालन-पोषण किया गया लेकिन उसकी मृत्यु के उपरांत बालक तुलसी को दर-दर भटकना पड़ा। भीख माँग कर उदरपूर्ति करनी पड़ी। लेकिन बाद में यही बालक संस्कृत का प्रकांड पंडित बना और लोकभाषा अवधी में रामचरितमानस नामक रामकथा लिखने का क्रांतिकारी कार्य किया। यह उनके अध्यवसाय के कारण संभव हुआ न कि किसी मुहूर्त विशेष की कृपा से। इस संसार के योग्यतम व्यक्ति किसी मुहूर्त विशेष की कृपा से आगे नहीं बढ़े अपितु अपने अथक प्रयास व सकारात्मक दृष्टिकोण से उन्होंने हर घड़ी को शुभ घड़ी में बदल दिया।

     समझदारी और विवेक से कोई भी समय शुभ समय हो जाएगा जबकि इसके अभाव में किसी भी घड़ी को अशुभ होते देर नहीं लगती। शुभ मुहूर्त के कारण जीवन में कभी भी महत्त्वपूर्ण कार्य करने के अवसर नहीं मिलते। एक आदर्श दिनचर्या अथवा आदर्श ऋतुचर्या का पालन करना ही वास्तव में शुभ मुहूर्त की सृष्टि करना है। हमारा विवेक, समय प्रबंधन, हमारी सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता, हमारा सामान्य ज्ञान व हमारी व्यावहारिक बुद्धि आदि ऐसे तत्त्व हैं जो किसी भी क्षण को शुभ अर्थात् उपयोगी बनाने में सक्षम हैं। शुभ मुहूर्त की तलाश छोड़ कर शुभ, उपयोगी व सकारात्मक कार्यों के चयन व उपलब्ध उपयोगी अवसरों के क्रियान्वयन में हम जितनी शीघ्रता कर सकें उतना ही हमारे लिए श्रेयस्कर होगा।

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