ख्वाबों की पूरी अपनी एक अलग ही दुनिया होती है | वो हकीकत की दुनिया से भले ही मेल न खाती हो पर दिल को तो सुकून देती है | ऐसे में जब कच्ची नींद के ख्वाब में प्रियतम खुद प्रियतमा के पास आ जाए तो मौसम कैसे न रंगीन हो जाए |
हिंदी कविता -कच्ची नींद का ख्वाब
कच्ची नींद में कोई ख्वाब देखा है जैसे,
तुमको अपने पास देखा है।
मेरे साने पर गिरती तुम्हारी गर्म सासें और तुम्हारे नर्म होठों का जिंदा आभास
उफ़.. हथेलियाँ भींगती सी लगी
मानों तलवों मे हजार तितलियाँ गुदगुदी सी कर गयी …
दिल बेतहाशा धड़का
कि आँख खुल गयी ..
फिर जैसे मेरे उंगलियों के पोरों से तुम्हारे बालों की खुशबू आयी
और आंखों के कोरों से तुम्हारे ना होने का गीला एहसास…..!!!
_______ साधना सिंह
गोरखपुर
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