जाड़े की धूप महिलाएं और विटामिन डी

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जाड़ों की नर्म धूप और आँगन में लेट कर
आँखों पे खींचकर तेरे आँचल के साए को
औंधे पड़े रहे कभी करवट लिये हुए


कौन है जिसे मौसम फिल्म का ये खूबसूरत गीत ना
पसंद हो ? और फिर जाड़े के दिनों में धूप में पड़े रहना भला किसको अच्छा नहीं लगता
,
उस
पर सखियों और मूँगफली का साथ हो तो कहने ही क्या
?



जाड़े की धूप  महिलाएं और विटामिन डी


एक समय था जब महिलाएं ११ बजे काम से
निवृत्त हो कर धूप सेंकने के लिए घर के बाहर चारपाई पर आ धमकती थीं |किसी के हाथ
में उन और सलाइयाँ होती , कोई मेथी बथुआ और पालक साफ़ कर रही होती ,कोई खरबूजे के
बीज छील रही होती तो कोई बच्चे के मालिश कर रही होती , और साथ में चल रहा होता
हंसी ठहाकों का दौर | बीच –बीच में दूसरी खटियाओं पर कम्बल ओढ़े पड़ी बुजुर्ग औरतें
कम्बल में से सर निकाल कर उनकी बात –चीत में अपनी विशेष टिप्पणी शामिल करती
रहती | बच्चे भी वहीँ पास में खेल रहे होते, और धूप  की गर्माहट के साथ –साथ रिश्तों
की गर्माहट से भी मन भर जाता | आज लोग इस तरह धूप  में नहीं बैठते , रिश्तों में भी
वो गर्माहट कहाँ बची है ? 

जाड़े की धूप  महिलाएं और विटामिन डी 


लेकिन ये बात सिर्फ  धूप और रिश्तों  की गर्माहट की नहीं है , धूप की गर्माहट
के साथ धूप में बैठने से विटामिन  डी भी
मिलता है
| ये तो सबको पता है कि विटामिन डी की कमी से
हड्डियाँ कमजोर पड़ जाती हैं
, कार्डियो वैस्कुलर बीमारियाँ हों सकती
हैं व् बच्चों को अस्थमा भी हो सकता है
| परन्तु बहुत कम लोग जानते हैं कि
विटामिन डी की कमी से अवसाद भी हो सकता हैं
| तो अगर आप का मन
खिन्न -खिन्न रहता है
, कुछ करने का जी नहीं करता , लगता
है देर तक पड़े रहे तो विटामिन डी की मात्रा को भी चेक कराये
| हो
सकता है अवसाद की दवाईयाँ खाने की जगह आप का विटामिन डी खाने से ही काम चल जाए
|
चेक
करने पर पता चल जाएगा कि विटामिन डी की कितनी कमी है
|डॉक्टरी  आंकड़ों के मुताबिक़…



 ३० से ६० ng/ml विटामिन डी की
सामान्य मात्रा है |
२१ से २९ ng/ml अपर्याप्त है ( यानी कम तो है पर बहुत घबराने की जरूरत
नहीं है )
० से २० ng/ml कम है
६० ng/ml से ऊपर ज्यादा है | ( जरूरत से ज्यादा विटामिन डी हड्डियों
से सम्बंधित समस्याएं उत्पन्न करता है )
कहने का तात्पर्य ये है कि ज्यादा कमी होने पर
दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है
|ये गोली व् शैशे दोनों के रूप में आती हैं , ज्यादातर विटामिन डी ३  सप्लीमेंट दिए जाते हैं | अगर आपको दावा लेने
की जरूरत हो तो डॉक्टर से पूछ लें | वैसे यह वासा युक्त भोजन  के साथ लेने से अधिक मात्रा में अवशोषित होता है | 
थोड़ी कमी होने पर अपने खाने में
विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों की मात्रा , जैसे  ,दूध , दही , मछली, गाय का दूध , सोयाबीन का दूध
, कॉड  लिवर आयल , मशरूम , अनाज , ओटमील आदि
से   बढाई जा सकती है फिर  अपने आँगन में आने वाली धूप तो है ही
| धूप में बैठने के लिए ११ से१ तक  का समय
सबसे मुफीद है
, कपड़ें  हलके हों तो बेहतर हैं | एक बार और आंकड़ों की शरण में जाकर आपको
बता दें कि एक स्वस्थ व्यक्ति को ६०० IU विटामिन की एक दिन में आवश्यकता होती है |
एक बात ख़ास तौर पर युवा महिलाओं से ….
क्योंकि आज कल कई बार युवा महिलाएं ये मान कर कि, “ धूप में बैठने से रंग साँवला
हो जाएगा”
,धूप में बैठने से परहेज करती हैं | जाड़े
की  धूप का रंग पर इतना असर नहीं होता
,
और
अगर कुछ होता भी है तो उसके लाभ के आगे नगण्य है
| वैसे , धूप
की तरफ पीठ करके भी बैठा जा सकता है
| यूँ विटामिन डी का चेहरे से कोई खास लगाव नहीं है
,
हाथों-पैरों में भी धूप लेने से विटामिन डी मिल ही जाता है |

एक एक और खास बात J आप सब से बाँटना चाहती हूँ  जो अभी कुछ दिन पहले एक लड़की ने कही |
हुआ
यूँ कि सब धूप में बैठे मूंगफलियों का आनंद ले रहे थे
| १० मिनट बाद वो
महिला अन्दर जाने लगी
| मैंने विटामिन डी की महत्ता बताते हुए उसे
रोकना चाहा तो उसने कहा कि मेरा तो रंग ज्यादा साँवला है मेरा तो दस मिनट में उतना
विटामिन डी बन गया जितना गोरे लोगों का दो घंटे में बनेगा
| आश्चर्य की बात
है कि ये भ्रम अधिकतर लोगों को होता है
| लोगों को लगता है कि जिनका रंग सांवला
है उन्हें बस थोड़ी ही देर धूप में बैठना चाहिए जबकि सच्चाई ये है कि अगर आपकी त्वचा सांवली है तो गोरी त्वचा वालों के मुकाबले सही मात्रा में विटामिन डी बनाने के लिए आपको दस गुना ज्यादा धूप की जरूरत होगी | ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपके स्किन पिगमेंट्स प्राकर्तिक सनस्क्रीन की तरह काम करते हैं , और सांवले लोगों में ये पिगमेंट्स अधिक मात्रा में होते हैं इसलिए सांवले लोगों को अधिक देर धूप में रहना होता है | 
  
कुछ अध्यन बताते हैं कि सांवली त्वचा वाले अधिक
उम्र के वयस्कों में विटामिन डी की कमी होने की अधिक संभावना  हो सकती है। मोटे
तौर पर जहाँ गोरे  लोगों का काम १०
पंद्रह मिनट में चल जाता है वहीँ काले
लोगों को एक घंटा धूप में बैठना चाहिए
| बूढ़े लोगों को और भी देर तक  धूप में बैठना
चाहिए क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ
साथ त्वचा द्वारा सूर्य की किरणों से
विटामिन डी बनने की क्षमता कम हो जाती है
| अच्छा है इसी उम्र से धूप में बैठ कर
विटामिन डी की मात्रा को दुरुस्त रखें | अब बात आंकड़ों की है तो बता दें कि ये
आँकड़े सर्दियों की धूप  के हैं , गर्मियों में थोड़ा कम से ही  काम चल जाएगा |
 फिर भी अगर आप रंग के प्रति
ज्यादा ही सावधान रहती हैं तो दिल थाम के बैठिये क्योंकि विटामिन डी की कमी से
मोटापा भी आ सकता है …. मतलब ये इधर नागनाथ उधर सांपनाथ |
           अब कारण भी बता ही दें , दरअसल वासा युक्त सेल्स
विटामिन डी को रक्त से चूस लेते हैं और रक्त परिसंचरण में इसकी कमी हो जाती है |
जिन लोगों का  बी एम आई ३० के
आस पास होता है उनमें ज्यादातर लोगों में विटामिन डी की बहुत कमी पायी जाती है |
चलते –चलते एक बात और बता दें अगर आप अपना विटामिन डी का लेवल दुरुस्त
रखती हैं तो आप ग्लूकोज इनटौलरेंस , डायबिटीज , हाइपर टेंशन और मल्टीपल
स्क्लेरोसिस से भी कुछ हद तक बची रहेंगी | है ना एक के साथ एक फ्री की स्कीम |
तो  कुछ देर तो गुज़ारिये धूप में
J | माना कि आप बिजी हैं | ऑफिस की ब्लोअर
की सुकून दायक गर्मी और घर में  दुपहरिया
का फेसबुक लोभ आपको धूप में बैठने से रोकता है तो भी संडे तो है ना , एक दिन कर
दीजिये धूप के नाम…. हो सकता है अच्छे स्वास्थ्य के साथ –साथ एक बार फिर रिश्तों
की गर्माहट जिन्दगी में पसरने लगे.. 

वंदना बाजपेयी 

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FILED UNDER-VITAMIN D, SUNNY DAY, WINTER, HEALTH

1 COMMENT

  1. वंदना दी,कई बार महिलाएं इसी डर की वजह से कि कहीं उनका रंग साँवला न हो जाए धूप नहीं लेती। धूप के ये फायदे जानकर शायद ऐसी महिलाए धूप का आनंद लेने लगे।

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