दीपक शर्मा की कहानी -चिराग़-गुल
ये कहानी पढ़कर फिल्म पाकीजा का एक गीत ख्यालों में चला आ रहा है | “ये चिराग़ बुझ रहे हैं …
ये कहानी पढ़कर फिल्म पाकीजा का एक गीत ख्यालों में चला आ रहा है | “ये चिराग़ बुझ रहे हैं …
हम सब ने सुदर्शन जी की कहानी ”हार की जीत’ पढ़ी है | कैसे बाबा भारती का घोडा डाकू खड़गसिंह …
हर माता पिता अपने बच्चे को प्यार करते हैं …बहुत प्यार और बच्चों की नज़रों में वो निर्दोष होते हैं …
जीवन स्वयं आगे बढ़ता है | पर हम उससे भी आगे बढ़ने की होड़ लगा लेते हैं | इतनी तेज …
ये देखना कितना सुखद है कि हम उन चीजों से आगे बढ़ गए जिन के बारे में कभी हम सोचते …
अभी पिछले दिनों मैंने “हंस अकेला रोया” में ग्रामीण पृष्ठभूमि पर लिखी हुई कहानियों का वर्णन किया था | आज …
फोटो क्रेडिट -आउटलुक इंडिया .कॉम गाँधी जी आज भी प्रासंगिक है | गाँधी जी के विचार आज भी उतने ही …
“गाँव” एक ऐसा शब्द जिसके जुबान पर आते ही अजीब सी मिठास घुल जाती है | मीलों दूर तक फैले …
ड्रीम गर्ल यानि स्वप्न सुंदरी | बरसों पहले इसी नाम से एक फिल्म आई थी जिसमें हेमामालिनी ने अभिनय किया …
श्राद्ध पक्ष यानी अपने परिवार के बुजुर्गों के प्रति सम्मान प्रगट करने का समय | ये सम्मान जरूरी भी है …
डॉटर्स डे, बहुत ही खूबसूरत शब्द है | पर हमारे देश में जहाँ बेटियाँ गर्भ में मार दी जाती हों …
आज का दौर बाज़ारों का दौर है | ये केवल अपनी जगह सीमित नहीं है | ये बाज़ार हमारे घर …
हम ऐसे समज में जीने के लिए अभिशप्त हैं जहाँ रिश्ते -नाते अपनत्व पीछे छूटते जा …
इस सदन में मैं अकेला ही दिया हूँ, मत बुझाओ ! जब मिलेगी, रोशिनी मुझसे मिलेगी पाँव तो मेरे थकन …
जीवन में खुश रहने के लिए मूलभूत आवश्यकताओं ( रोटी कपड़ा और मकान ) के बाद हमारे जीवन में सबसे …
प्रभात रंजन जी की मनोहर श्याम जोशी जी के संस्मरणों पर आधारित किताब ‘पालतू बोहेमियन’ अपने नाम से वैसे ही …
पूर्वानुमान या इनट्युशन किसी को क्यों होता है इसके बारे में ठीक से कहा नहीं जा सकता | फिर भी …