क्या आप अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखते हैं?

मेंटल हेल्थ , फिजिकल हेल्थ की तरह महत्वपूर्ण है | हमारा मन विचारों का भोजन करता हैं | सही विचारों को लानेके लिए हमें कुछ प्रयास करने पड़ेंगे जिससे हमारी मेंटल हेल्थ सही रहे |

           
क्या आप अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखते हैं?



 कहते हैं,  "पहला सुख निरोगी काया”| हम सब सब अपने – अपने तरीके से  इस बात का प्रयास करते हैं कि हम स्वस्थ रहे|  जैसे  खाने में हरी सब्जियां ज्यादा लेना, तले – भुने से परहेज, जिम या वॉक करने की आदत डालना आदि- आदि|  कई लोग तो अपनी सेहत का इतना ध्यान रखते हैं कि एक – एक कैलोरी गिन – गिन कर खाते हैं|  लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो समय रहते  सेहत का ध्यान नहीं रखते और किसी न किसी रोग का शिकार हो जाते हैं|  उसके बाद डॉ. ढेर सारे परहेज बता देते हैं|  फिर तो वो उन परेहेजों का पालन करने ही लग जाते हैं, क्योंकि वो जानते हैं कि,  “जान है तो जहान है”|

                          ये तो रही फिजिकल हेल्थ की बात, अब बात करते हैं मेंटल हेल्थ की| क्या हम अपनी मेंटल हेल्थ का भी उतना ही ध्यान रखते हैं?  उत्तर है नहीं| क्यों? क्योंकि हमारे देश में मेंटल हेल्थ का सीधा सा सम्बन्ध पागल हो जाने से लगाया जाता है|  पागल हो जाना मतलब दिमाग पर पूरी तरह से कंट्रोल खो देना होता है| मेंटल हेल्थ के अंतर्गत निराशा, अवसाद, ज्यादा गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, किसी काम में मन न लगना आदि ऐसे बहुत से लक्षण  आते हैं जो हमारे खराब मानसिक स्वास्थ्य की और संकेत करते हैं|  फिर भी हम उनका ध्यान नहीं रखते हैं| 


Do you take care of your mental health?

  
                     जिस तरह से हम शरीर को चलाने के लिए भोजन करते  हैं| उसी तरह से हमारा दिमाग भी भोजन करता है| शरीर के लिए भोजन हम रुच विध कर बनाते हैं, अनेकों मसालों से तैयार करते हैं, प्यार से परोसते हैं, फिर खाते हैं |  क्या आप अपने मष्तिष्क के भोजन के लिए भी यही करते हैं|  नहीं, मष्तिष्क को तो जो मिलता है वो बेचारा खाने लगता है, फिर क्यों न अपच की शिकायत हो?

                   हम सुबह से ले कर रात तक हम जो कुछ भी देखते सुनते, सोंचते हैं वो सब हमारे दिमाग का भोजन है| आप ने महसूस किया होगा कि जब आप कोई मार-धाड़  वाली फिल्म देखते हैं, वीडियो गेम खेलते हैं, फेसबुक या निजी जिंदगी में बहस में पड़ते हैं तो आप का दिमाग उत्तेजित हो जाता है|  वहीँ जब आप भजन सुनते हैं, बगीचे में बैठ कर फूलों का आनंद लेते हैं, या बच्चों के साथ खेलते हैं  तब आप का दिमाग शांत हो जाता है|  पॉजिटिव लोगों के साथ रहते हैं तो उर्जा और जोश से भरपूर हो जाता हैं| क्यों? यह उस विचार रुपी भोजन की प्रकृति है जो आप अपने दिमाग को खिला रहे हैं| विचार ही हमारे मष्तिष्क का भोजन हैं| 


 आप अपने आप अपने मेंटल हेल्थ के लिए क्या करते हैं? 


अब जरा अपनी दिनचर्या पर नज़र डालिए-


  1. आप सुबह उठे सबसे पहले न्यूज़ पेपर उठाया| उसमें ख़बरों में पहले पेज पर किसी ट्रेन या बस एक्सीडेंट की खबर, किसी रेप की खबर, किसी बच्चे के शोषण की खबर होगी| उन्हें पढ़ते ही आप का मन निराशा , क्रोध और क्षोभ में भर जाएगा|  सुबह से ही आप के मन में नकारात्मकता भर जायेगी|  सुबह का समय जब अपने को पॉजिटिव करने का होता है, पर  हम न्यूज़ से अपडेट रहने की चाह में खुद को निगेटिव कर लेते हैं|  आप कह सकते हैं कि आज के समय में ख़बरों से दूर रहना बेवकूफी ही समझी जायेगी|  आप सही हैं पर  जैसा कि ब्रह्मकुमारी शिवानी जी कहती हैं कि -
  2. सुबह-सुबह ख़बरों को पढने से बचना चाहिए| जो खबरें है, वो घटनाएं घट चुकी हैं| अब उसमें कुछ किया नहीं जा सकता, परन्तु आप अपनी सुबह सकारत्मकता/नकारात्मकता से शुरू कर के अपना दिन बना या बिगाड़ सकते हैं| 
  3. ख़बरों के बाद आपाधापी होती है  स्कूल / ऑफिस जाने की, और उन्हें भेजने की...वो समय हड़बड़ी में निकल जाता है| 
  4. उसके बाद (अगर आप गृहणी है तो )आप के घर कोई आया|  या आप  किसी के घर गए और आप लग गए उनसे किसी तीसरे की चर्चा करने में|  इस बुराई- भलाई से आप भी नकारात्मक हो रहे हैं और उसे भी नकारात्मकता भेज रहे हैं जिसके बारे में बात कर रहे हैं|
  5. अगर आप ऑफिस में काम करते हैं तो काम के साथ- साथ वहां भी बॉस की, कलीग की बुराई तो करना आम बात है| कुछ नहीं तो किसी मुद्दे पर बहस ही कर ली| नहीं तो "रैट रेस" के कारण या तो खुद को जरूरत से ज्यादा झोंक दिया, नहीं तो हीन भावना ही भर ली|   क्या इसमें भाग लेकर हम खुद को चूहा नहीं साबित कर रहे|   
  6. शाम का पूरा समय ख़बरों की बहस देखने में या सोशल मीडिया पर इसकी - उसकी कहानियाँ पढ़ कर कुंठित होने में बिताते हैं| 
  7. रात को सोने से पहले बिस्तर पर लेटे - लेटे या तो अतीत को याद कर दुखी हुए या फिर भविष्य की चिंता करते हुए भयभीत होते हुए सो गए| 


                                   ये अमूमन हम में से हर किसी की दिनचर्या है|  हमने ही इसमें इतनी नकारात्मकता भर रखी है कि हमारी मेंटल  हेल्थ प्रभावित हो रही है|  

फिर भी हम सब यही कहेंगे...ये तो नार्मल है|

ये नार्मल नहीं है| अगर ये नार्मल होता तो क्या बात-बात पर गुस्सा आता, उलझन होती, बेचैनी होती, सही खाते हुए भी ब्लड प्रेशर या डाइबिटीज या हार्ट डिसीज के शिकार न होते| हम सब जानते है की ये बीमारियाँ शरीर को गलत भोजन देने कही नहीं मन को गलत भोजन देने का परिणाम हैं|  मेंटल हेल्थ  का लक्षण  है कि आप ज्यादा शांत, खुश व् संतुष्ट रहते हैं| 


कैसे रखे अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान

                           ये तो हमने जान लिया कि हम सब जो विचार रुपी भोजन  अपने दिमाग को देते हैं वो हमारी अच्छी या बुरी मेंटल हेल्थ को प्रभावित करता है| अगर आप शांत सुखी व् संतुष्ट रहना चाहते हैं तो आप को अपनी मेंटल हेल्थ का ध्यान रखना होगा| उसके कुछ नियम हैं-


दिन की शुरुआत शांति से करें 


                      जैसे जब हमारे घर कोई आता हैं तो हम उसका स्वागत मुस्कुरा कर करते हैं, उसी तरह से ये दिन हमारे जीवन में आया है| क्या कभी आप सोंचते हैं कि कितने लोग हैं जो आज उठे ही नहीं|  इसलिए हर दिन को अपनी उपलब्द्धि समझिये, ईश्वर का दिया उपहार समझ कर उसका ख़ुशी से स्वागत करिए|  सुबह न्यूज़ पेपर से दूर रहिये|  बेहतर हो आप न्यूज़ पेपर ९ -१० बजे के आस-पास पढ़ें|
              अब ऐसे बहुत से लोग होंगे जो ऐसी जगह काम करते हैं जहाँ उन्हें हर समय न्यूज़ से अपडेट रहना पड़ता है वो क्या करें?

उनके लिए सुबह और भी महत्वपूर्ण  होती है| उन्हें, जिन्हें सारा दिन नकारात्मकता से जूझना है, सुबह का समय भजन सुनने, बगीचे में टहलने, या फूल  चुनने में लगाना चाहिए| जिससे वो इतने सकारात्मक हो जाएँ कि सारे  दिन की नकारात्मकता झेल सकें| 


दूसरों की बुराई करने से बचे 


                      जब हम दूसरों की बुराई कर रहे होते हैं तो हम एक पूरा नकारात्मक माहौल तैयार कर रहे होते हैं| इससे हम उसे भी नाकात्मकता भेज रहे होते हैं जिसकी बात कर रहे होते हैं बल्कि खुद भी नकारात्मकता को अपनी और खींच रहे होते हैं| बेहतर है जो जैसा करता है उसे उसके हाल पर छोड़ कर अपनी जिन्दगी को अच्छा बनाने का प्रयास करें| अगर किसी की बात बुरी भी लगी है तो बार- बार वही बात दोहराने से वो अच्छी नहीं लग जायेगी| उस बुरी बात से सबक लें और आगे बढें | 


सकारात्मक लोगों को अपनी मित्र मंडली में शामिल करें 


                                       हम वही सोंचते हैं जैसा हमारे आस -पास के पाँच सबसे करीबी व्यक्ति सोंचते हैं| इसलिए जहाँ तक संभव हो ऐसे लोगों से दूरी बनाए जो हर समय, हर बात में नकारात्मकता  देखते हों|  उसके स्थान पर ऐसे लोगों से दोस्ती करें जो ज्यादा खुश व् शांत रहते हैं|  देखिएगा इसका असर आप के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ेगा| 


आज में जीना सीखे 

                       नकारात्मकता का एक बड़ा कारण होता है कि या तो हम कल की यादों में खोये रहते हैं कि हमने तब ये वो कर लिया होता तो कितना अच्छा होता या फिर इसने उसने ऐसा क्यों किया/ नहीं किया| या फिर हम भविष्य में जी रहे होते हैं कि ऐसा हो तो अच्छा है/या ऐसा ना हो| दोनों ही परिस्थितियों में मानसिक तनाव उत्पन्न होता है| बेहतर है हर दिन को आज में जिए| केवल आज को ईश्वर द्वारा दिया गया एक एसाइनमेंट समझे, व् उसे पूरे  दिल से पूरा करने की कोशिश करें|  


ध्यान का सहारा लें 

                  मेंटल हेल्थ को दुरुस्त रखने के लिए धयान सबसे बेहतर खुराक है|  ये वो विटामिन है जो आपकी मानसिक सेहत के लिए बहुत जरूरी है|  आप कितने भी व्यस्त क्यों न हों हर रोज कम से कम 15 मिनट ध्यान को दें| इसकी अनेक विधियां हैं जिनको आप पढ़ कर या किसी गुरु से सीख कर शुरू कर सकते हैं| अगर आप को सीखने का भी समय नहीं है तो बस अपने विचारों को साक्षी भाव से आते -जाते हुए देखिये| धीरे-धीरे मन स्थिर होने लगेगा व् शांत भी रहने लगेगा | 


ख़ास है सोने के ठीक पहले का समय 

                             जिस तरह से सुबह  उठने का समय खास है, जहाँ आप को खुश हो कर दिन का स्वागत करना होता है, वैसे ही रात को सोने से ठीक पहले का समय बहुत ख़ास है| इस समय आप को अपने अवचेतन मन को जाग्रत करना होता है| जिसे आप लेख "आत्म-सुझाव  द्वारा अपने जीवन को कैसे बदलें" में पढ़ सकते हैं| बेहतर हो कि आप कुछ अच्छा देख कर, पढ़ कर या सुन कर सोये| इससे आप का सोते समय भी मन शांत रहेगा व् आप सुबह भी शांत भाव से उठेंगे| 

                             तो ये थे कुछ उपाय जिनको अपना कर आप अपने मेंटल हेल्थ को सही रख सकते हैं| यहाँ पर ध्यान देने की एक और बात ये है की जिस तरह से एक दिन खाना खा कर ५ दिन तक हमारा स्वास्थ्य सही नहीं रहेगा| हमें रोज खाना, खाना पड़ेगा, उसी तरह मेंटल हेल्थ के लिए भी हमें रोज प्रयास करना पढ़ेगा| 

सरिता जैन 

लेखिका


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