भगवान बुद्ध से तीन प्रश्न -चाइना की प्रेरणादायक लोककथा

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भगवान बुद्ध से तीन प्रश्न -चाइना की प्रेरणादायक लोककथा

लोक कथाएँ , जिन्हें दादी नानी की कहानियाँ भी कहते हैं , बहुत खूबसूरत तरीका होता है जिसमें बच्चों को कथा के माध्यम से शिक्षा  दी जाती हैं | आज हम ऐसी ही एक लोक कथा ले कर आये हैं जो  सफल होने के सूत्र बताती हैं | आइये पढ़ें …

भगवान बुद्ध से तीन प्रश्न -सफलता का संदर्श देती चाइना की प्रेरणादायक लोककथा 

बहुत समय पहले की बात है चाइना में एक लड़का जिंग झियांग रहा करता था | वो अनाथ  था व् बहुत गरीब था | जिंग यहाँ -वहाँ  सबसे भीख मांग -मांग कर खाना  इकट्ठा किया करता था | जब वो खाना लाकर घर में रख देता तब नहाने के लिए जाता | नहाने के बाद आ कर देखता तो उसे हमेशा खाना बहुत कम मिलता | उसे बहुत दुःख होता कि वो इतनी मेहनत से खाना इकठ्ठा कर के लाता है वो भी कम हो जाता है | एक दिन वो खाना रख कर वहीँ बैठ गया | थोड़ी देर में एक चूहा वहाँ  आया और उसका खाना खाने लगा | चूहे को देख कर जिंग ने उससे कहा ,”  एक तो मैं वैसे ही गरीब हूँ, ऊपर से तुम मेरा खाना खा जाते हो , जिसे मैं यहाँ -वहाँ  से मांग कर लाया होता हूँ | तुम अमीरों के घर का खाना क्यों नहीं खाते , उन्हें तो कोई फर्क भी नहीं पड़ेगा |

सफलता का बाग़

चूहा जिंग की बात सुनकर बोला ,” ये तो तुम्हारे भाग्य में लिखा है तुम जिंदगी भर गरीब ही रहोगे , तुम्हें पूरा खाना नहीं मिलेगा , इसीलिये मैं अमीरों का खाना न खा कर तुम्हारा खाना खाता हूँ | 

चूहे की बात सुन कर जिंग दुखी हो कर बोला ,” क्या मुझे सारे जिन्दगी ऐसे ही भीख मांग कर आधा खाना खा कर रहना होगा | क्या मुझे ऐसे नारकीय जीवन से कभी छुटकारा नहीं मिलेगा |

चूहे ने कहा ,” ये तो मैं नहीं बता सकता , हाँ , भगवान् बुद्ध जरूर बता सकते हैं | पर उन तक जाना बहुत मुश्किल है , तुम शायद रास्ते  में ही मर जाओ |

जिंग ने कहा , अब चाहे कुछ हो मैं भगवान् बुद्ध से पूंछने जरूर जाऊँगा | 

जिंग भगवान् बुद्ध से पूंछने चल दिया कि क्या उसके भाग्य में हमेशा गरीब रहना ही लिखा  है या कुछ करके उसका भाग्य बदला भी जा सकता है |

पहला प्रश्न 

चलते -चलते रात हो गयी | जिंग ने सोचा कि किसी घर में शरण के लिए आग्रह किया जाए | पर वहाँ  तो सब बड़ी-बड़ी हवेलियाँ थीं | जिंग को आशा नहीं थी कि कोई उसे रात गुज़ारने की अनुमति देगा | फिर भी उसने हिम्मत करके एक हवेली का द्वार खटखटा दिया | आशा के विपरीत उन लोगों ने उसे शरण दे दी |ये जान कर की जिंग भगवान् बुद्ध से मिलने जा रहा है , उन लोगों ने उससे कहा ,” हम  भी बहुत दुखी हैं , हमारी एक ही बेटी है जो बोल नहीं पाती , पहले बोलती थी और गाना भी बहुत सुरीला गाती थी पर अचानक से उसने बोलना बंद कर दिया | बहुत इलाज करवाया पर कोई फायदा नहीं हुआ | तुम भगवान् बुद्ध से पूँछ कर बताना कि वो कब बोलेगी ?
जिंग ने हामी भर दी | अगली सुबह जिंग ने वहाँ  से विदा ली | 




दूसरा प्रश्न 

आगे बढ़ने पर जिंग को एक बर्फ का पहाड़ मिला | जिंग हिम्मत करके आगे बढ़ता गया |  ठंडी हवाओं से उसकी रूह काँप रही थी , फिर भी वो मृत्यु की चिंता न करते हुए आगे बढ़ता  जा रहा था | तभी उसे एक झोपडी दिखाई दी | उसने थोड़ी देर आराम करने की सोच कर झोपडी के द्वार पर आवाज़ दी | उसमें से एक व्यक्ति निकला | उस व्यक्ति ने उसे खाने को दिया | उसने बताया कि वो एक जादूगर हैं वो पिछले एक हज़ार  सालों से स्वर्ग का रास्ता खोज रहा है , इसके लिए उसके पास जादू की छड़ी भी है पर फिर भी उसे रास्ता नहीं मिल रहा है | उसने लड़के से कहा कि वो  भगवान् बुद्ध के पास जाए तो पूंछे कि उसे स्वर्ग का रास्ता कब मिलेगा | जिंग ने हामी भर दी | जादूगर ने खुश हो कर जादू की छड़ी से उसे बर्फ का पहाड़ पार करवा दिया |

तीसरा प्रश्न 

अब लड़का और आगे बढा … अ तो और भी बड़ी मुसीबत थी | सामने एक विशाल नदी थी | जिसकी तूफानी लहरों के बीच उसे पार करना जान पर खेलने के बराबर था |  पर जिंग तो सर पर कफ़न बाँध कर ही निकला था | उसने नदी तैर कर पार करने का मन बनाया | तभी वहां एक बहुत बड़ा कछुआ आया | कछुआ जिंग से बोला ,” मैं तुम्हे नदी पार कराउंगा तुम मेरी पीठ पर बैठ जाओ | जिंग उसके विशाल कवच पर बैठ गया | रास्ते में उसने कहा ,” मैं पिछले 500 सालों  से ड्रैगन बनने का प्रयास कर रहा हूँ , अभी तक नहीं बन आया हूँ | अगर तुम भगवान् बुद्ध के पास जा रहे हो तो उनसे पूँछन मैं ड्रैगन कब बनूँगा | उसे भी हामी भर के जिंग आगे बढ़ा |

जब जिंग ने भगवान् बुद्ध से पूंछे तीन प्रश्न 

आगे कुछ और कठनाइयाँ  पार करते हुए जिंग भगवान् बुद्ध के पास पहुँचा | नतमस्तक हो के उसने भगवान् बुद्ध से अपने प्रश्न पूंछने कीअनुमति मांगी | भगवान् बुद्ध ने कहा ,” मैं तुम्हारे सिर्फ तीन प्रश्नों के उत्तर दूँगा |

अब जिंग असमंजस में पड़ गया | वो भगवान् से कौन से तीन प्रश्न पूंछे | अंत में उसे लगा कि वो लड़की बेचारी बोल नहीं पा  रही है | जादूगर हज़ार साल से प्रयास कर रहा है , कछुआ ५०० सालों से प्रयास कर रहा है | इन सब की तकलीफ कितनी बड़ी है | मेरा क्या है मैं तो भीख मांग कर खाता था , भीख मांग कर ही खाता रहूँगा | जिंग ने अपने प्रश्न छोड़ कर बाकी तीन प्रश्न पूँछ लिए |

भाग्य में रुपये


भगवान् बुद्ध ने कहा ,” जब वो कछुआ अपना कवच उतर देगा तो वो ड्रैगन बन जाएगा | वो जागुगर अपनी छड़ी का मोह पाले हुए हैं जैसे ही वो छड़ी छोड़ देगा तो उसे स्वर्ग का रास्ता मिल जाएगा , और वो लड़की जब अपने जीवनसाथ से मिलेगी तो बोलने लगेगी |

भगवान् बुद्ध कोप्रनाम कर  जिंग वापस लौटने लगा |

जिंग की वापसी 

सबसे पहले वो कछुए से मिला | उसके कहने पर कछुए ने अपना कवच उतार दिया | कवच के नीचे बहुत सारे हीरे थे जो उसने जिंग को दे दिए | कवच उतारने के थोड़ी देर बाद वो ड्रैगन बन गया और जिंग को  धन्यवाद देता हुआ वहाँ  से चला गया |

अब जिंग जादूगर के पास आया | जादूगर को अपनी छड़ी बहुत प्रिय थी पर हकीकत जान कर उसने जिंग को वो छड़ी दे दी और उसे इस्तेमाल करने का तरीका भी बताया | तभी उसे स्वर्ग से एक सीढ़ी लटकती दिखाई दी और वो जिंग को धन्यवाद देता हुआ उस पर चढ़ कर स्वर्ग चला गया |

जिंग हीरे और छड़ी ले कर हवेली में लौटा | उसे देख कर सब बहुत खुश हुए | सबने उससे अपने प्रश्न का उत्तर जानना चाहा | जिंग ने कहा ,” चिंता न करे , जब वो लड़की अपने जीवन साथी से मिलेगी तो बोलने लगेगी | सब खुश हो गए | तभी वह लड़की जो परदे के पीछे से सारा वार्तालाप सुन रही थी , सामने आ कर जिंग से बोली ,” आपका शुक्रिया , आपने मेरे लिए भगवान् बुद्ध से यह प्रश्न पूछा | उसे बोलता देख सबको समझ आ गया कि जिंग ही उसका जीवनसाथी है | उन्होंने जिंग के सामने शादी का प्रस्ताव रखा जिंग ने हामी भर दी | अब जिंग एक भिखारी नहीं रह गया बल्कि उसके पास कीमती हीरे हवेली व् खूबसूरत पत्नी थी |

सफलता का सन्देश 

मित्रों इस कहानी में बहुत खूबसूरत सन्देश छिपा है | जिंग ने दूसरों की भलाई की खुद के लिए कुछ नहीं माँगा फिर भी उसे इतना मिला जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी | यानि जो दूसरों का हाथ पकड कर चलता है, उसे अहंकार के साथ अकेले चलने वाले से कहीं ज्यादा सफलता मिलती  है |

जादूगर को मोह था , अपनी जादू  की छड़ी से , उसका त्याग करते ही उसे स्वर्ग की सीढ़ी दिख गयी | दरअसल सफलता हमारे आस -पास होती है पर हम अपनी वस्तु स्थिति के मोह में इस कदर जकड़े होते हैं कि वो रास्ता हमें दिखता ही नहीं , अपनी कम्फर्ट ज़ोन छोड़ कर आगे बढ़ने से ही सफलता मिलती है |

कछुए का कवच भय का प्रतीक है | भय ग्रस्त व्यक्ति  कभी सफल नहीं हो सकता | अपना भय छोड़ कर ही जो आगे बढता है वही सफल होता है |

                    ये एक छोटी से लोककथा हमें सफलता के सारे सूत्र बताती है | अगर आप भी सफलता की कामना करते हैं तो कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलें , भय लगे तो उसका सामना करें , सोचे कि जो लग बिना हाथ -पैर , आँख , नाक कान के होते हैं वो भी तो हिम्मत करते हैं | सफलता की ऐसी कई कहानियाँ आपने पढ़ी होंगी | फिर आपके तो ईश्वर  की कृपा से सारा शरीर  सही सलामत है ,…. आलस और भय त्यागिये , आगे बढिए |

अटूट बंधन परिवार 


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