जो खुद टूट रहा है वो क्या किसी को कुछ दे सकता है , पर मान्यता तो ये ही है कि टूटता तारा हर मन्नत पूरी करता है |

टूटते तारे से मिन्नतें

कहते हैं टूटते तारे से जो मानगो वो मिल जाता है | इसलिए जब भी कोई टूटता तारा दिखता है हाथ खुद ब खुद दुआ के लिए जुड़ जाते हैं |लेकिन किसी विरहणी  की मिन्नतें कुछ अलग ही होती हैं .... 

कविता -टूटते तारे से मिन्नतें 



हर टूटते तारे से मिन्नतें करती हूँ 
हर ऊंचे दर पर माथा टेकती हूँ 
काश कोई मेरी किस्मत तुमसे जोड़ दे 
जाने -अनजाने में हो गये अलग जो हम 
कहीं किसी जगह..... किसी ठिकाने 
जहां तुम मिल जाओ मेरी राह उधर मोड़ दे
गर हो ना सके इतना भी 'खुदा ' तो 
बस इतनी सी इल्तिज़ा है मेरी 
ले ज़िन्दगी मेरी ..तार सांसों का तोड़ दे ...!!! 


            गोरखपुर 

कवियत्री



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filed under: women, poetry, hindi poetry, kavita, shooting star
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Atoot bandhan

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3 comments so far,Add yours

  1. बहुत ही सुंदर

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  2. बहुत बढ़िया।

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  3. प्रेम के मधुर सम्बन्ध को लिखती सुन्दर रचना ...
    बहुत बढ़िया ...

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