अब चैन से सोऊंगी

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अब चैन से सोऊंगी

तुम्हारा आना तुम्हारा होना मेरा पूर्णता का द्योतक 

तुम प्रेम हो इससे इतर 
मैं सम्मान क्या जोहूंगी |
कियें अास सब तूने पूरे  …विश्वास मेरा जीता 
हुआ मेरा सांस-सांस तेरा 
 तेरी उम्मीद मैं बोऊंगी | 
अब  तरंग है, उमंग है , रास-रंग है ये जीवन 

एक तुझे पाकर जो पाया है,   

तुझे खोकर ना खोऊंगी | 
गुदगुदाती रहती है मन को तेरी मीठी ये  बातें 
तुने तोहफे में हंसी दी है अब 
एक आँसू ना रोऊंगी  |  
बहुत गुजरी है रातें मेरी उलझन में, बेचैनियों में 
तेरे बांहों का तकिया लेकर 
अब चैन से सोऊंगी || 

_____=== साधना सिंह 
लेखिका
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