होली की छुट्टी मे अतुल को घर आना था। बीमार मां को होली के त्योहार मे गुझिया बनानी पडेगी! इससे बेहतर मै खरीदकर ही ले जाता हूं ये सोच आफिस से लौटते हुऐ अतुल ने ATM से 2000रूपये निकाले और अपने पर्स मे रख अपने कन्धे पर टंगे पिठ्ठू बैग की अगली जेब मे रख मस्ती से चलते हुऐ मिठाई की दुकान पर पहुंच गुझिया के दो डिब्बे देने को कहा।
मिठाई बढिया है ना इस बात की तसल्ली वास्ते ज्योहि झुका तभी भीडभाड मे कब चोर ने बैग से पर्स चोरी कर लिया अतुल को पता ही नही चला!
मिठाई लेकर ज्योहि पैमेन्ट देने हेतु पर्स निकाला तो कलेजा धक्क से रह गया! दिल्ली जैसे NCR शहर मे इतना ऐतियात रखते रखते हुऐ भी अतुल के संग ये हादसा हो गया था।
पर्स मे पैसो के संग संग दैनिक जरूरत का सामान भी चला गया था। ATM कार्ड क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड, पेन कार्ड, डाईविंग लाइसेस कार्ड वोटर कार्ड, मेटरो कार्ड सब एक ही झटके मे गायब हो चुका था। भाग कर बैक पहुंचा ATM बंद करवाया।
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FIR दर्ज करवायी! पर सब बेकार। दुखी मन से कुछ सोचने बैठा तभी अतुल के कानो मे मां की आबाज आयी…. कुछ दिन पहले ही मां ने हिदायत दी थी बेटा इतना सामान एक साथ पर्स मे मत रखो! पर मैने ही मां को ये कहकर चुप करा दिया था… अंजाने शहर मे रहता हूं इसकी जरूरत पडती रहती है! पर आज के नुकसान ने जीवन भर सावधान रहने की सीख दे दी थी।
रीतू गुलाटी

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