कौन नहीं सफल होना चाहता , फिर विशिका के जीवन का सपना ही बॉस बनना था | उसने इसके लिए तैयारी बहुत की थी , फिर क्यों इंटरव्यू की तिथि पास आते ही वो इसे न देने के बहाने खोजने लगी |
इंटरव्यू
सुनील और विशु एक ही ऑफिस में काम करते हैं | रैंक भी लगभग एक जैसी ही है | जहाँ विशु महत्वाकांक्षी थी और जल्दी से जल्दी बॉस बनना चाहती थी, इसके लिए वो मेहनत भी बहुत कर रही थी | ऑफिस में सब को पता था | वहीँ सुनील हमेशा आरामदायक तरीके से काम करने में विश्वास करता था | उसे न प्रोमोशन की जल्दी थी न आगे बढ़ने की , अगर किसी चीज की उतावली रहती थी तो ये कि लेटेस्ट मैच , मूवी न छूट जाए | जहाँ सुनील खुश मिजाज व जल्दी दोस्त बम्नाने वाला वहीं विशु अंतर्मुखी पर ईश्वर की इच्छा ,साथ काम करते हुए दोनों की दोस्ती हुई फिर दोनों के दिल मिल मिल गए | घरवालों को भी कोई दिक्कत नहीं थी | शादी के लिए हाँ कर दी |
इसी बीच विशु का इंटरव्यू आ गया | अगर वो इंटरव्यू क्लीयर कर लेती तो उसे सुनील का बॉस बन जाना था | सबको उसकी सफलता की उम्मीद थी | परन्तु जैसे -जैसे इंटरव्यू पास आ रहा था विशु इंटरव्यू न देने के बहाने खोजती जा रही थी | ऑफिस में सब को आश्चर्य था कि आखिर विशु को क्या हो रहा है | उस दिन इंटरव्यू था , सुबह से विशु दिखाई नहीं दे रही थी | सुनील ने कई बार फोन किया विशु ने उठाया ही नहीं | सुनील परेशान था … आखिर क्या कारण हो सकता है ? उसने अपने सहकर्मी के साथ विशु के घर जाने की सोची |
वंदना बाजपेयी
यह भी पढ़ें …
वारिस
Comments are closed.