कवि के एक मछेरन के प्रेम में पड़ जाने की रोमांटिक कविता


कविता -मछेरन
मछेरन एक रोमांटिक कविता है ... जिसमें कवि मछली पकड़ती स्त्री को देखकर मंत्रमुग्द्ध हो जाता है और उसे वो स्त्री दुनिया की सबसे सुंदर स्त्री लगने लगती है .......

मछेरन




मै नदी के किनारे बैठा------------- एकटक उस साँवली सी मछेरन को तक रहा था, जो डूबते हुये सूरज की लालिमा मे, अपनी कसी हुई देहयष्टि के कमर तक साड़ी खोसे, एक खम और लोच के साथ, अपनी मछली पकड़ने वाले जाल को खिच रही थी, मुझे यूँ लगा कि जैसे-------- उसकी जाल की फँसी मछलियों मे से, एक फँसी हुई मछली सा मेरा मन भी है. वे इससें बेखबर, एक-एक मछली निकाल------- अपने पास रंखे पानी से भरे डिब्बे, मे डालती रही. बस इतना उसने इतनी देर मे जरुर किया, कि अपने माथे पे गिर आये, बाल को पीछे कर, उसने कुछ और बची मछलियाँ, उस डिब्बे मे रख, गीले जाल और डिब्बे को पकड़, ज्यो घुटनों भर पानी से निकली, तो यूँ लगा कि जैसे-------- वे साँवली मछेरन, विश्व कैनवास की सबसे खूबसूरत औरत हो. रंगनाथ द्विवेदी जज कालोनी, मियाँपुर जिला--जौनपुर.
कवि -रंगनाथ दुबे
यह भी पढ़ें ...


आपको "मछेरन  "कैसे लगी अपनी राय से हमें अवगत कराइए | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको "अटूट बंधन " की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम "अटूट बंधन"की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके इ मेल पर भेज सकें |



filed under-Hindi poetry, fisherman, 
Share To:

Atoot bandhan

Post A Comment:

1 comments so far,Add yours

  1. वाह ... यथार्थ के रंगों को केनवास पे उतार दिया हो जैसे ...
    अच्छी रचना है ...

    ReplyDelete