बिछोह

बिछोह

वरिष्ठ लेखिका दीपक शर्मा जी की कहानियों की खास बात होती है उनके शीर्षक, और कथ्य को कहने का वो …

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बस अब और नहीं !

बस अब और नहीं

स्वतंत्रता या गुलामी ये हमारा चयन है | कई बार गुलामी के चयन के पीछे सामाजिक वर्जनाएँ होती हैं  तो …

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छतरी

छतरी

  दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैं /बारिश की एक बूँद न बे-कार जाने दूँ .. अजहर फराग …

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वसीयत 

वसीयत

बिन ब्याही बेटियाँ, तलकशुदा, परित्यक्ता या विधवा महिलायें सदियों से उस घर पर बोझ समझी गईं जिस के आँगन की …

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जीकाजि

जिकाजि

प्रेम न बाडी उपजे, प्रेम न हाट बिकाई । राजा परजा जेहि रुचे, सीस देहि ले जाई ॥ कितनी खूबसूरत …

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हंसते जख्म

हँसते जख्म

विवाह एक ऐसी गांठ, जिसमें दो लोग एक -दूसरे के साथ जिंदगी भर हर लम्हा प्यार के, अपनेपन के , …

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भ्रम 

कहानी -भ्रम

भ्रम में जीना कभी अच्छा नहीं होता, लेकिन हम खुद कई बार भ्रम पालते हैं .. बहुत लोग हैं हमारे …

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कार्टून

कार्टून

चित्रकला में सिद्धहस्त माँ जब अपनी बेटी को एक चित्रकला की बारीकियाँ सिखाती है तो कहती है कि “काग़ज़ पर …

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लैण्ड स्लाइड

लैंड स्लाइड

लैंड स्लाइड या भूस्खलन -ठोस चट्टान अथवा शैल यदि अचानक ढलान पर फिसल जायें तो उसको भू-स्खलन कहते हैं ।  …

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हारने से पहले

हारने से पहले

जीवन में हम कितनी ही बार परेशान होकर कहते हैं, “ये जीना भी कोई जीना है”या “इससे तो मौत भली”  …

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