मां

कवि मनोज कुमार रूठने पर झट से मना लेती थी मां दवा से ज्यादा दुआ देती थी कुछ बात थी उसके हाथों …

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राग झुमर सुन रहा हूँ

रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी मै उसके कान की बाली का राग झुमर सुन रहा हूं, कंगन,बिछुवे,चुड़ियां संगत कर रही, कोई घराना नही …

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मैं गंगा

फ़ोटो क्रेडिट::::अभिषेक बौड़ाई मैं गंगा जानते हैं सभी बहती आई हूँ सदियों से अपनों के लिए इस पावन धरा पर …

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दो स्तन

ये महज कविता नही वरन रोंगटे खड़े करता एक भयावह यथार्थ है। रंगनाथ द्विवेदी कुछ भिड़ झुरमुट की तरफ देख, …

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निर्भया को न्याय है

रचयिता—–रंगनाथ द्विवेदी। जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर। ये महज़ फाँसी नहीं————— उस निर्भया को न्याय है। जो चीखी,तड़पी,छटपटाई तेरी विकृत कुंठा के …

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बिकते शब्द

शब्द  मीठे /कडवे  बनाओं तो बन जाते   शस्त्र  तीखे बाण /कानों को अप्रिय  आदेश  हौसला ,ढाढंस ऊर्जा बढ़ाते  मौत को …

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सतरंगिनी – ओमकार मणि त्रिपाठी की सात कवितायें

1… आखिर  कब तक….?  डूबे रहोगे  सिर्फ बौद्धिक व्यभिचार में वक्त पुकार रहा हैसमस्याओं के उपचारकी बाट जोह रहे हैं …

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सपेरे की बिटिया

कभी पढ़ने आती थी हमारे स्कूल में, सपेरो की बस्ती से————— एक सपेरे की बिटिया। वे तमाम किस्से सुनाती थी …

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