सामर्थ्य

होलाड़ली मेंसामर्थ्य इतनाउड़े ऊँची उड़ानअपने जिये सपनों के लिएतो चलेंउसके साथबिना किसी शर्त केऊबड़-खाबड़,पथरीलेरास्तों पर भीकरेअन्याय कासामना स्वयंदे दोषियों को …

Read more

Share on Social Media

ज़रूरतें

गिनते हुए ज़रूरतें वो निकला घर से हड़बड़ाता ,बड़बड़ाता गिड़गिड़ाता ! वो निम्न मध्यम वर्गीय जीव ! बहुतायत में पायी …

Read more

Share on Social Media

प्यार का चाँद

करवा चौथ की सभी व्रती महिलाओ के प्यार की एक खूबसूरत कविता—- (प्यार का चाँद) हमने पाया है तुममे अपने …

Read more

Share on Social Media

गाँधी

किताबोंफ़ोटो मेंड्राइंगरूमओफिसों में हीबचें हैं गाँधीनहीं हैं तो बससबके दिलों में नहीं हैंशिक्षाएँ उनकीपुस्तकालयों,भाषणों मेंक़ैद हैचरख़ाम्यूज़ियम मेंजब उन्हेंजगाना होगागाँधी जयंती …

Read more

Share on Social Media

हे! राम

आज एक बड़ा तबका बहुत मौन है——- नही बताना चाहता वे किसी को कि गाँधी कौन है? हिंसा गोड़से की …

Read more

Share on Social Media

अन्तराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर कविता – मैं वृद्धाश्रम में हूँ

मैंवृद्धाश्रम में हूँपर दुखी नहीं हूँअपने समवयस्कों के साथमिल करगति देती हूँदैनिक कार्यों कोयहाँ सबबाँटते हैं एक साथअपने सुखधूप में …

Read more

Share on Social Media

जुलाहा हूँ

रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)। मै पंडित नही———— तेरी मस्जिद का अजा़न, और तेरी बस्ती का जुलाहा हूँ। देख लेता हूँ सारे …

Read more

Share on Social Media

जापानी तेल लगाओ—-राधे माँ

रचयिता—-रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश) तुम भी अब स्वर्ण-भस्म और शीलाजीत सी——- कोई दवाई खाओ—राधे माँ। बर्दाश्त नही हो रहा आशाराम और …

Read more

Share on Social Media
error: