अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष -मैं स्त्री

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष  मैं  ———— अपने पराये रिश्तों में इतना विष मिला  पीकर नीलकंठ हो गई मैं अब  …

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संस्मरणात्मक आलेख ~आस्था का पर्व – अहोई अष्टमी

कुछ यादें अहोई अष्टमी की  शरद पूर्णिमा की अमृतमयी खीर का आस्वादन करने के पश्चात् दांपत्य प्रेम में प्रेम के …

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सामर्थ्य

होलाड़ली मेंसामर्थ्य इतनाउड़े ऊँची उड़ानअपने जिये सपनों के लिएतो चलेंउसके साथबिना किसी शर्त केऊबड़-खाबड़,पथरीलेरास्तों पर भीकरेअन्याय कासामना स्वयंदे दोषियों को …

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करवाचौथ : एक चिंतन

   हमारा देश एक उत्सवधर्मी देश है। अपने संस्कारों, परम्पराओं, रीति-रिवाजों का संवाहक देश ! पूरे वर्ष कोई न कोई उत्सव, इसलिए …

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गाँधी

किताबोंफ़ोटो मेंड्राइंगरूमओफिसों में हीबचें हैं गाँधीनहीं हैं तो बससबके दिलों में नहीं हैंशिक्षाएँ उनकीपुस्तकालयों,भाषणों मेंक़ैद हैचरख़ाम्यूज़ियम मेंजब उन्हेंजगाना होगागाँधी जयंती …

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अन्तराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर कविता – मैं वृद्धाश्रम में हूँ

मैंवृद्धाश्रम में हूँपर दुखी नहीं हूँअपने समवयस्कों के साथमिल करगति देती हूँदैनिक कार्यों कोयहाँ सबबाँटते हैं एक साथअपने सुखधूप में …

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शिक्षक दिवस – हमारे व्यक्तित्व को गढ़ने के लिए जीवन के हर मोड़ पर मिलते हैं शिक्षक

डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई ——————————- हमारी संस्कृति ऐसी है कि इसमें हर पल, हर समय हम अपने माँ, पिता, गुरुओं, …

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देश भक्ति के गीत

डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई, देहरादून, उत्तराखंड जय गान करें ———————– भारत का जय गान करें आओ हम अपने भारत की …

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कान्हा तेरी प्रीत में – जन्माष्टमी के पावन पर्व पर डॉ . भारती वर्मा की कवितायें

कान्हा तेरी प्रीत में ~पढ़िए प्रभु श्रीकृष्ण को समर्पित डॉ . भारती वर्मा की कवितायें  1–कान्हा ————– कान्हा तेरी प्रीत …

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क्या है स्वतंत्रता सही अर्थ :जरूरी है स्वतंत्रता, स्वछंदता, उच्श्रृंखलता की पुनर्व्याख्या

डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई, देहरादून, उत्तराखंड ——————————————-             स्वतंत्रता का क्या अर्थ है?  स्वतंत्रता का …

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शिखरिणी छंद

शिखरिणी छंद—रक्षाबंधन पर डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई देहरादून, उत्तराखंड 1– रेशम सूत्र बनता नेह डोर संबंध गूढ़। —— 2– भाई …

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पिता को याद करते हुए

डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई ——————————– कल बहुत दिनों बाद सुबह मिली  खिली खिली बोली उदास होकर तुम्हारे पिता मुझसे रोज़ …

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मैं गंगा

फ़ोटो क्रेडिट::::अभिषेक बौड़ाई मैं गंगा जानते हैं सभी बहती आई हूँ सदियों से अपनों के लिए इस पावन धरा पर …

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