मोक्ष

 मोक्ष   जैसा की हमेशा होता है बच्चे जब छोटे होते हैं तो उन्हें दादी – नानी धार्मिक कहानियां सुनाती …

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भुलक्कडपन

वंदना बाजपेयी  पहले मैं अक्सर रास्ते भूल जाया करती थी,क्योंकि अकेले ज्यादा इधर -उधर जाने की आदत थी नहीं स्कूल …

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अब मॉफ भी कर दो

स्वीकारती हूँ  सींच रही थी मैं  अंदर ही अंदर  एक वट वृक्ष  क्रोध का  कि चुभने लगे थे कांटे  रक्तरंजित  …

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