महँगे काजू

काजू महँगे होते हैं इसमें कोई शक नहीं | पर क्या अपने नुकसान की भरपाई किसी दूसरे से कर लेना …

Read more

Share on Social Media

ऊँट की पीठ

एक लोकगीत जो कई बार ढोलक की थाप पर सुना है, “विदा करके माता उऋण हुईं, सासरे की मुसीबत क्या …

Read more

Share on Social Media

जीवन का सत्य

“संसार से भागे फिरते हो भगवान् को तुम क्या पाओगे” चित्रलेखा फिल्म का यह लोकप्रिय गीत जीवन के सत्य को …

Read more

Share on Social Media

बिटर पिल

यूँ तो ये जिंदगी एक बिटर पिल ही है जिसे हमें चाहे अनचाहे गटकना ही पड़ता है | ज्यादातर लोग …

Read more

Share on Social Media

उसका जवाब

जो स्त्री अपने घर में सबकी सफलता के लिए सीढ़ी बनती है , क्यों उसके सपनों में कोई साथ नहीं …

Read more

Share on Social Media

वसूली

वरिष्ठ लेखिका दीपक शर्मा जी की कहानियों में कस्बापुर का खास स्थान है | लेकिन इस कस्बापुर में बुनी गयी …

Read more

Share on Social Media

वैज्ञानिक व् अध्यात्मिक विकास के समन्वय के प्रबल समर्थक थे स्वामी विवेकानंद

Cultural India से साभार हम सब के आदर्श स्वामी विवेकानंद, जिन्होंने भारतीय संस्कृति व् दर्शन का पूरे विश्व में प्रचार …

Read more

Share on Social Media

माँ का दमा

क्या मन की दशा शरीर में रोग उत्पन्न करती है ? अगर विज्ञानं की भाषा में कहें तो ‘हाँ ” …

Read more

Share on Social Media

व्रत

अरे बशेसर की दुल्हिन , ” हम का सुन रहे हैं , अब तुम हफ्ता में तीन  व्रत करने लगी …

Read more

Share on Social Media

चमड़े का अहाता

वरिष्ठ लेखिका दीपक शर्मा जी की कहानियों में एक खास बात रहती है कि वो सिर्फ कहानियाँ ही नहीं बाचती …

Read more

Share on Social Media
error: