नवगीत-ठहरी शब्द नदी

चढ़े हाशिये  पर सम्बोधन ठहरी शब्द-नदी।। चुप्पी साधे पड़े हुए हैं कितने ही प्रतिमान यहाँ अर्थहीन हो चुकी समीक्षा सोई …

Read more

Share on Social Media
error: