श्री राम

तेरी पीड़ा की प्रत्यंचा को—— सब खीच रहे है राम! तेरी नगरी मे, तुम्हें टेंट से ढक कर, मंदिर यहीं …

Read more

Share on Social Media

माँ गंगा

जल दिवस के उपलक्ष्य मे माँ गंगा की पीड़ा पर लिखी कविता——– कविता – माँ गंगा माँ गंगा———- अब धरती …

Read more

Share on Social Media

बदलते हुए गाँव

गाँव यानि अपनी मिटटी , अपनी संस्कृति और अपनी जडें , परन्तु विकास की आंधी इन गाँवों को लीलती जा …

Read more

Share on Social Media

पतंगें

हम सब ने पतंगे आसमान  में उड़ाई हैं | बड़ा ही मनोरंजक खेल हैं | पर यहाँ मैंने पतंग को …

Read more

Share on Social Media

जल जीवन है

अखिल सृष्टि में जल जीवन है जीवन का सम्मान करो संरक्षित कर स्वच्छ सलिल को धरती में मुस्कान भरो जिस …

Read more

Share on Social Media

सुहागरात (कविता )

यूँही पड़ी रहने दो कुछ दिन और कमरे मे— हमारे सुहागरात की बिस्तर और उसकी सिलवटे। मोगरे के अलसाये व …

Read more

Share on Social Media
error: