शहीद दिवस पर कविता

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शहीद  दिवस पर कविता

शहीद दिवस भारत माता के तीन वीर सपूत भगतसिंह , राजगुरु व् सुखदेव को  कृतज्ञ राष्ट्र का सलाम है |अंग्रेजी हुकूमत ने
23 मार्च सन 1931 को फांसी पर लटका दिया था | देश की स्वतंत्रता के लिए अपने
प्राणों का बलिदान करने वाले ये तीनों हमारे आदर्श हैं आइये पढ़ते हैं उन्हीं को
समर्पित कविता ..

शहीद  दिवस पर कविता



वे 
देश के लिए 
अपना आगा-पीछा 
देखे-सोचे बिना 
हँसते-हँसते 
फाँसी के 
फंदे पर झूल गए 
और आज 
अपने आस-पास 
अन्याय होते 
देख कर भी 
नहीं निकलते 
घर से बाहर
देखते हैं बस 
अपने घर की 
खिड़कियों पर लगे 
परदों का एक कोना हटा कर 
चोरों की तरह 
कितना अंतर आ गया है 
स्वतंत्र होने के बाद 
शहीदों को याद करते हैं 
नमन करते हैं 
सोशल मीडिया पर 
गूगल से ढूँढ-ढूँढ कर 
शहीदों की फ़ोटो 
पोस्ट करते हैं 
सभाएँ,कार्यक्रम करते हैं 
उनकी फ़ोटो पर 
माल्यार्पण कर 
देश के लिए अपना 
सर्वस्व समर्पण की 
बात करते हैं 
पर समय आने पर 
देश तो बहुत दूर 
अपने आस-पास तक के लिए भी 
बाहर निकलने तक में 
डरते हैं 
कुछ करने में 
सौ बार सोचते हैं
और केवल सोचते रहते हैं 
शहीदों की विरासत को
इस तरह संभाले
बस खड़े रहते हैं।
————————-
डा० भारती वर्मा बौड़ाई

लेखिका
फोटो क्रेडिट –shutterstock


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filed under- shaheed divas, 23 march, bhagat singh

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