गलतियों की सजा दें या माफ़ करें

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गलतियों की सजा दें या माफ़ करें

सीमा जी मेरे पास बैठ कर आधे घंटे से अपनी एक सहेली की बुराई कर रही थी , जिसने अपने बेटे की शादी में उन्हें देर से कार्ड देने की गलती कर दी थी  , हालांकि उसकी सहेली ने कहा था कि कार्ड बाँटने का काम उसने स्वयं नहीं किया था | उन्होंने अपने एक सम्बन्धी को कार्ड व् गेस्ट लिस्ट पकड़ा दी थी , जब उन्हें उनकी गलती का पता चला तो शादी वाले दिन तमाम कामों में से समय निकाल कर स्वयं उनके घर उन्हें बुलाने गयीं, पर सीमा के हलक के नीचे ये तर्क  उतर नहीं रहा था |

                                       ये समस्या सिर्फ सीमा की नहीं है | हममें से कई लोग किसी दूसरे की गलती या खुद की गयी गलती को माफ़ नहीं कर पाते | उसकी नाराजगी या कसक जीवन भर पाले रहते हैं | सबंधों में दूरी बढ़ा  कर हम दूसरे व्यक्ति या खुद को सजा दे रहे होते हैं , जिसका खामियाजा हमें अपने स्वास्थ्य और ख़ुशी की कुर्बानी के रूप में देना  पड़ता है | हर गलती सजा देने के लायक नहीं होती | अलबत्ता कुछ गलतियाँ  सजा की हकदार होती है | क्या ये जरूरी नहीं कि हम समझ लें कि किन गलतियों पर सजा दी जाये किन पर नहीं |

गलतियों के लिए  सजा दें या माफ़ करें 

                                            गलतियों के लिए  सजा दें या माफ़ करें पर बात करने से पहले मैं आप को छोटे से दो उदहारण दूंगीं  |

नन्हा सोनू डॉल हॉउस बना कर खेल रहा था | उसने  करीब एक घंटे की मेहनत से डॉल हाउस बनाया था | तभी उसका बड़ा भाई मोनू स्कूल से आया | वो एक छोटा सा प्लेन उठा कर दौड़ -दौड़ कर उसे उड़ाने लगा | इसी क्रम में वो सोनू के डॉल हॉउस से टकरा गया | डॉल हाउस टूट गया | सोनू जोर -जोर से रोने लगा | रोने की आवाज़ सुन कर उनकी माँ तृप्ति वहाँ आई | स्थिति समझ कर वो सोनू को समझाने लगी ,” भैया ने जानबूझकर कर नहीं तोडा है , भूल से हुआ है , कोई बात नहीं मैं तुम्हारे साथ लग कर अभी दुबारा बना देती हूँ | तृप्ति सोनू के साथ डॉल हॉउस बनाने लगी व् उसने मोनू को दूसरे कमरे में खेलने को कह दिया | थोड़ी देर में मोनू भी सोनू के साथ खेलने लगा |

मुकेश जी के दोस्त सुरेश जी उनसे कई बार मिलने को कह चुके थे | मुकेश जी अपने व्यापर में इतने व्यस्त थे कि चाहते हुए भी समय नहीं  निकाल पाए | एक दिन अचानक उनके पास खबर आई कि कार एक्सीडेंट में सुरेश जी की मृत्यु हो गयी है | 35 साल के सुरेश जी का यूँ चले जाना किसी सदमें से कम नहीं था , पर मुकेश जी के मन में दर्द के साथ -साथ एक गिल्ट या अपराधबोध भी भर गया | उन्हें लगा उनसे बहुत बड़ी गलती हुई है | वो अपने मित्र के लिए समय नहीं निकाल पाए | इस अपराधबोध के कारण वो अवसाद में चले गए , व्यापार धंधा , घर-परिवार सब चौपट हो गया |

समझें गलती हुई है या की है 

                                  जब भी कोई गलती करता है या हमसे खुद ही कोई गलती हो जाती है तो हम दोष देना शुरू कर देते हैं | किसी को आरोपी सिद्ध कर देना समस्या का समाधान नहीं है | ऐसे मौकों पर हमें देखना चाहिए कि गलती की है या हो गयी है | अगर जानबूझ कर गलती किहे तो ये एक अपराध बनता है | अगर अनजाने में हो गयी है तो उसके लिए क्षमा कर देना अपने व् उस रिश्ते के लिए बेहतर है | जैसा कि सोमू की माँ ने मोनू  को गलत न मान कर किया | वहीँ मुकेश जी जो ये कल्पना भी नहीं कर सकते थे कि उनका मित्र इतनी जल्दी दुनिया से चला जाएगा , उसके जाने के बाद खुद को व् अपने व्यापर को दोषी समझने लगे | काम से अरुचि हुई व् व्यापार ठप्प हो गया | .

खुश रहना चाहते हैं तो एक दूसरे की मदद करें 

जब भी कोई दूसरा गलती करे तो पहले ये पता लगाने का प्रयास करें कि गलती की है या अनजाने में हो गयी है | अगर दूसरे से अनजाने में गलती हो गयी है | उसका इरादा आप को ठेस पहुँचाने का या आप का नुक्सान करने का नहीं था तो उसे क्षमा कर दें |

  अगर आप से कोई गलती  अनजाने में हो गयी है तो खुद को भी क्षमा कर दें | मान के चलें कि इंसान गलतियों का पुतला है , गलतियाँ   हो जाती हैं | इस गलती से सबक लें और जिंदगी में आगे बढें |

जब जानबूझ कर गलती की जाये 

                                               जब कोई जानबूझ कर गलती करे तो उसे सजा अवश्य दें | क्योंकि अगर तब सजा नहीं दी जायेगी तो वो व्यक्ति फिर से गलती करेगा | बार -बार की गयी गलतियाँ उसे सुधरने का मौका नहीं देंगी और एक न एक दिन वो रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जायेगा | पर सजा गलती के अनुसार ही होनी चाहिए जैसे ..

आप विद्यार्थी हैं व् आपका  मित्र आपसे नोट्स ले लेता है परन्तु आप को जरूरत पड़ने पर नहीं देता है , या आप की पढ़ाई  का तरीका जान लेता है पर अपना तरीका आप से शेयर नहीं करता है | ऐसे में आप भी उसके साथ वही व्यव्हार करिए , ताकि उसे समझ आ सके कि अगर वो आपसे दोस्ती चाहता है तो उसे भी आपकी तरह देना भी सीखना होगा |

अगर आप व्यापार करते हैं और आप का मित्र आप को गलत टिप्स बता कर आपका आर्थिक नुक्सान कर देता है परन्तु अपने व्यापर में अन्य तरीके आजमा कर मुनाफा कमाता है .. तो यह जानबूझ कर की गयी गलती है, उसे क्षमा करने के स्थान पर उससे दूरी बना लें क्योंकि जिसकी वृत्ति आपको नुक्सान पहुँचाने की है वो आप का मित्र नहीं है | इस दूरी से उसे सिग्नल मिल जाएगा की अगर वो पैतरे चलेगा तो आप को खो देगा , इसलिए उसे अपने पैतरे छोड़ कर सच्ची मित्रता अपनानी है |

अगर आप का जीवनसाथी  आप  से अपशब्द बोलता है या हाथ उठाता है तो ये जानबूझ कर करी हुई गलती है , यहाँ क्षमा करने का मतलब उस अपराध को स्वीकृति देना हैं | ऐसे में आप अपना विरोध दर्ज करिए | हो सके  तो कुछ दिन के लिए मायके चली जायें | जिससे उसे अहसास हो कि अगर वो आप के साथ ऐसा व्यवहार करेगा तो आप उसके साथ नहीं रहेंगी , ये भय उसे आगे से ऐसा व्यवहार करने से रोकेगा |

जब भगवान् राम ने पढ़ाया कार्पोरेट जगत का महत्वपूर्ण पाठ

अगर आप के बच्चे वृद्धावस्था में न आपको समय देते हैं न ही सेवा करते हैं तो उन्हें क्षमा मत करिए | अपने धन को अपने उन सेवकों को दीजिये जो आप की सेवा कर रहे हैं |

किसी ऐसे रिश्ते को मत ढोइये जहाँ व्यक्ति बार -बार गलती करता है | शुरू में आपको दर्द होगा परआपकी आने वाली जिंदगी सुखद होगी

अगर आप स्वयं कोई गलती जानबूझ कर करते हैं और बाद में पछताते हैं और सब कुछ ठीक करना चाहते हैं … तो ये मान के चलिए कि सब कुछ पहले जैसा  होना संभव नहीं है | क्षमा करना या न करना आपके नहीं उस व्यक्ति के हाथ में है |  आप बस इतना कर सकते हैं कि उसके साथ आगे से सिर्फ अच्छा व्यवहार करें ,  जिससे आपका मन पवित्र होगा , फिर भी क्षमा करना इस बात पर निर्भर है कि उसकी आत्मा का घाव कितना गहरा है | एक पुरानी फिल्म ‘दुश्मन चाचा ‘ इसी विषय पर आधारित है | जिसमें मृतक की पत्नी सबसे बाद में क्षमा कर पाती है क्योंकि उसकी आत्मा का घाव बहुत गहरा था |

अपराध और गलती में फर्क करिए | अगर कोई ऐसी गलती है जो अपराध के दायरे में आती है तो क़ानून का सहारा लेने में संकोच न करें |

                                           मित्रों , ये थे कुछ उपाय जिन पर चल कर हम यह निर्णय लें सकते हैं कि  किसी गलती पर क्षमा करें या सजा दें , सजा दें भी तो कितनी | उम्मीद है अब आप गलतियों का सही वर्गीकरण करने की गलती नहीं करेंगे |

नीलम  गुप्ता

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