Entrepreneur और Employee दोनों किसी कम्पनी के लिए जरूरी है | पर सक्सेस मंत्र दोनों के लिए अलग -अलग हैं | आइये जाने एक मालिक या कर्मचारी के रूपमें आपको क्या करना है |

                                         
सक्सेस टिप्स -Entrepreneur और Employee दोनों के लिए


आपने एक कहावत तो सुनी होगी, " एक तीर से दो शिकार " | आज हम एक ऐसी ही जबरदस्त success tips लायें है जो Entrepreneur और Employee दोनों के लिए कारगर है | हम Entrepreneur हो या  Employee हों , हम दोनों की प्राथमिकता सफलता होती है | जहाँ कंपनी का मालिक चाहता है कि उसकी कंपनी ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाए वहीँ उसमें काम करने वाले ये चाहते हैं कि company तो लाभ कमाए ही साथ उनकी जगह उस कम्पनी में सुरक्षित रहे | उन्हें  कंपनी की ग्रोथ के साथ उन्हें अच्छी तनख्वाह व् अन्य सुविदायें  मन माँगी मिलती रहे | आज इस बात को समझाने के लिए एक छोटी सी प्रेरक कहानी का सहारा ले रही हूँ |

Entrepreneur और Employee दोनों के लिए सक्सेस का मंत्र 



                                              एक व्यापारी था |  वह एक शहर से माल खरीद कर ( जहाँ वो सस्ता था )  दूसरे शहर में( जहाँ उसकी मांग ज्यादा थी ) बेंचता था | रास्ते में बहुत बड़ा जंगल नदी पहाड़ आदि थे | जिसके कारण व्यापारी दूसरे शहर कम ही पहुँच पाते थे | व् ये व्यापारी  कॉम्पटीशन कम होने के कारण बहुत लाभ कमाता था | एस काम के लिए उसके पास दो  गधे थे | जिनके ऊपर वो सामान लाद  कर एक शहर से दूसरे शहर  ले जाया करता था |

 व्यापारी गधों के खाने -पीने का बहुत ध्यान नहीं रखता था | उनमें से एक गधा मर गया , तो व्यापारी ने दूसरा गधा  खरीदा और पहले की तरह सामान ले कर दूसरे शहर की तरफ चला | नया गधा बहुत धीमे -धीमे चल रहा था | व्यापारी को दूसरे शहर पहुँचने में बहुत ज्यादा समय लगा | अबकी बार उसका माल पहले की तरह हाथों -हाथ नहीं बिका क्योकि कुछ दूसरे व्यापारी उससे पहले आ गए थे | उसे काफी समय दूसरे शहर रुकना पड़ा | पहले इतने समय में वो दो चक्कर लगा लेता था | उसका नुक्सान हुआ | क्योंकि  समय भी धन है |


अगली बार त्यौहार का समय था | जल्दी न पहुंचता तो नुक्सान बहुत होता | इसलिए शुरू से ही उसने पह्ले गधे पर ज्यादा सामान लादा व् दूसरे पर कम , दूसरा गधा फिर भी धीरे ही चला पर उस पर सामान कम था इसलिए पहले जितनी देर नहीं हुई | फिर भी वो लोग जब तक पहुंचे ज्यादातर लोगों ने त्यौहार की खरीदारी कर ली थी | व्यापारी का फिर नुकसान हुआ |

अबकी बार व्यापारी ने दूसरे गधे पर आधे से भी कम सामान लादा , फिर भी दूसरे गधे की स्पीड पहले से कम ही थी | व्यपाऋ अबकी  बार देर नहीं करना चाहता था | इसलिए उसने दूसरी गधे का सामान और कम करके पहले गधे पर भार  बढ़ाना शुरू किया | दूसरे  गधे के पास नाम मात्र का बोझ था | अब वो पहले गधे के साथ -साथ चल रहा था | उसने मुस्कुरा कर पहले गधे से कहा , " अब भुगतो ज्यादा काम करने का नतीजा , देखो मैं तो खाली चल रहा हूँ और तुम सारा बोझ ढो रहे हो | दाना - पानी दोनों को बराबर ही मिल रहा है | पहला गधा निरुत्तर हो गया |


पर कहानी यहीं खत्म नहीं हुई | रास्ते में कई रातें जंगल में पड़ती थी | इस बार व्यापारी कम्बल लाना भूल गया था | उसने सोंचा दूसरा गधा तो किसी काम का नहीं है , तो उसने रास्ते में पड़ने वाले गाँव में जाकर दूसरे गधे को मार कर उसकी खाल से कम्बल बनवा  लिया | 


अब व्यापारी के पास एक ही गधा था | व्यापारी को उसी से काम लेना था | अब उसे उसके मन का खाना देना होता , वो उसे मार भी नहीं सकता था , अगर वो रुक जाए तो मजबूरन उसे रुकना पड़ता | अब पहले गधे की मर्जी  उसके व्यापार में शामिल होने लगी थी |


मित्रों ये कहानी अब हम नए एंगल  से देखते हैं ... यहाँ व्यापारी Entrepreneur है और  गधे Employee ( केवल प्रतीक के रूपमें ले रहे हैं |)

अगर आप Entrepreneur  हैं 

                                            अगर आप Entrepreneur हैं तो आप को ध्यान रहना होगा की आप का बिजनेस किसी एक व्यक्ति पर निर्भर न रहे | नहीं तो वो व्यक्ति बाद में आप पर दवाब डाल सकता है और आप को बिजनेस बंद हो जाने के डर से उसका हर दवाब मानना पड़ता है |  उसे उसके मन की सेलेरी छुट्टी , काम करने की सुविधा देनी पड़ती है | अगर इतने पर भी आप का काम चल रहा है तो भी ठीक है , नहीं तो अगर उस व्यक्ति ने कहीं और बहुत ज्यादा ऑफर पर चला गया या खुदा न   खस्ता  बीमार पड़ गया  भगवान् न करे अगर उसकी मृत्यु हो गयी तो आप का बिजनेस पूरी तरह से बैठ   जाएगा |  स्टीव जॉब्स को अपनी ही कम्पनी से निकाले जाने की घटना को भला कोई कैसे भूल सकता है | तो फिर ध्यान दीजिये -

बिजनेस एक टीम वर्क है और  आपको इसे यही शक्ल देनी चाहिए |
आप को स्वयम ही योग्य लोगों की छटनी व् योग्य लोगों की भर्ती  करनी चाहिए |
अगर आप की टीम में कम योग्य लोग हैं तो उनकी छटनी न करके उनमें योग्यता पैदा करें , उनके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम हो, उन्हें  कॉम्पटीशन में रहने के लिए ज्यादा घंटे काम करने के लिए प्रेरित करें |
उन्हें कम्पनी से निकालने के स्थान पर उनकी परफोर्मेंस बढाने के लिए उनके आदर ग्रेडिंग सिस्टम द्वारा नि काले जाने का भय उत्पान करें |



ये तो बात रही की आप की वन मैंन आर्मी न बनने की पर योग्य व्यक्ति दूसरों से ज्यादा काम करते हुए अपने को अपमानित महसूस करके आपकी कम्पनी को छोड़ कर  न चला जाए इसके लिए उसकी सेलेरी व् छुट्टी , अन्य सुविधाओं , बोनस , इंक्रीमेंट  का ध्यान ज्यादा रखे |
समय -समय पर उसे गिफ्ट दें |
उसके साथ पर्सनल संबंध बना कर रखे , जिससे उसे ये न लगे की आप अन्य लोगों जो कम काम करते हैं और उसके साथ सामान व्यवहार कर रहे हैं | ऐसे में वो या तो काम के प्रति उत्साह  खो देगा या आपकी कम्पनी छोड़ देगा |

अगर आप Employee हैं 


                                    अगर आप Employee हैं और भले ही आपको लग रहा हैं की आप दूसरों से ज्यादा काम कर रहे हैं , तो भी रुकिए नहीं | और ज्यादा काम करिए , रात को जागिये , सुबह जल्दी उठिए , टूर करिए या कुछ ऐसा जिससे कम्पनी की पकड़  आपके हाथ में आ जाए |  कम्पनी का वो नायब हीरा बन जाइए जिसे कोई कम्पनी किसी भी हालत में खोना नहीं चाहेगी | इससे आप की जगह कम्पनी में सुरक्षित तो होगी ही साथ ही एक समय बाद आप अपनी शर्तों पर पगार , छुट्टियां व् सुविधायें प्राप्त कर सकते हैं |


                                   तो मित्रों ये थे कुछ सक्सेस टिप्स चाहे आप Entrepreneur या  Employee आप दोनों के काम के हैं | दोनों ही स्थितियों में कम्पनी का फायदा है | उसी में आप का फायदा है |


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Atoot bandhan

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