लॉटरी का टिकट हमारा भाग्य बदलने की क्षमता रखता है, पर इसके लिए उसे खरीदना पड़ता है| भगवान् और इंसान के बीच की एक प्रेरणादायक कहानी

                                             
लॉटरी का टिकट


लॉटरी का टिकट भले ही दस- बीस रुपये का हो , वो इंसान को करोण  रुपये जिता  कर मालामाल कर सकता है |  यह एक भाग्य का खेल है और कभी शायद भाग्य साथ दे जाए इसी आशा में लोग लॉटरी खरीदते हैं | पर यहाँ आज इस कहानी के माध्यम  से एक सीख देने की कोशिश की गयी है -

Motivational Hindi story- Lottery ka ticket


बहुत समय पहले की बात है| एक आदमी था वो जो भी काम करता उसे असफलता ही मिलती |  थोडा -थोडा कर के उसका बहुत सारा पैसा डूब गया | अब उसके पास कोई नया काम करने का पैसा भी नहीं था| लोगों ने उसे समझाया तू किसी के यहाँ नौकरी कर ले , कम से कम पेट तो भरेगा | भाग्य की मार है , अब ईश्वर ने यही लिखा है तो यही सही|  इन सब बातों  से उस व्यक्ति का दुःख और बढ़ गया| उसको लगने लगा ईश्वर ने उसके नसीब में हार ही क्यों लिखी है | 

यही सोंचते -सोंचते एक दिन वो मंदिर पहुँच गया|


मंदिर बहुत सुनसान जगह पर था | कोई था नहीं इसलिए वो भगवान् की मूर्ति के पाँव पकड कर बहुत देर तक रोता रहा , और कहता रहा , भगवान् मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था , जो तुमने मेरे हिस्से में हार लिखी है | हर कदम पर असफलता लिखी है | अब मैं क्या करूँ ? सुना है तुम सब कुछ कर सकते हो | कम से कम एक लॉटरी का टिकट ही लगवा दो | 

ये प्रार्थना  करके वो घर चला गया | 

अब वो हर दूसरे तीसरे दिन मंदिर आता और भगवान् से कहता ," हे प्रभु दया करो , कम से कम एक लॉटरी का टिकट ही लगवा दो | ऐसा करते -करते करीब एक साल बीत गया | 


वो आदमी फिर मंदिर आया | उसने भगवान् के आगे बैठ कर फिर रोना शुरू किया ," प्रभु  क्या बैर है मेरा आपसे , साल भर हो गया आप के पास आते -आते , अभी तक आपने मेरी प्रार्थना नहीं सुनी | आज मैं आखिरी बार आया हूँ , अब कभी आप के दरवाजे पर नहीं आऊंगा | अब तो दया करके एक लॉटरी का टिकट लगवा दो |


कहते हुए वो व्यक्ति दुखी मन से मंदिर के बाहर जाने लगा , तभी मूर्ति से आवाज़ आई , " अरे मूर्ख  पहले लॉटरी का टिकट खरीदों तो सही "|

                                        मित्रों ये कहानी भले ही काल्पनिक हो पर इसकी शिक्षा सच्ची है | हम भगवान् से मांगते तो रहते हैं पर काम की  दिशा में पहला कदम ही नहीं बढ़ाते या फिर काम शुरू तो कर दिया जोश -खरोश के साथ पर वहीँ रुक जाते हैं | अगला कदम बढाते ही नहीं | ऐसे में सफलता कैसे मिलेगी | हर दिन एक लॉटरी का टिकट है जिसमें हमको बहुत सी खुशियाँ , सफलता और धन देने की क्षमता है पर उस लौटरी के टिकट  को अपनी मेहनत के द्वारा खरीदना पड़ता है | वरना सिर्फ मांगने से संसार का मालिक भी कुछ नहीं कर सकता | 


टीम ABC

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Atoot bandhan

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