पुर्नस्थापन

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पुर्नस्थापन

तुलसी मात्र एक पौधा ही नहीं है वो हमारी संस्कृति और भावनाओं का प्रतीक भी है  जिसका पुनर्स्थापन जरूरी है | प्रतीक के माध्यम से संवेदनाओं को संजोने का सन्देश देती कविता 

कविता -पुर्नस्थापन

क्यों तुलसी को उसके  
आँगन से उखाड़ ले जाओगे ?
भला वहाँ कैसे पनपेगी
रोप कहाँ तुम पाओगे ?

इतने दिन की पाली पोसी
कैसे यह बच पाएगी
अपने गाँव शहर से कटकर
यह कैसे रह पाएगी ? 

जब अनुकूल नहीं जलवायु
नहीं सहन कर पाएगी
दे विश्रान्ति उसे , तुम ऐसी
खाद कहाँ से लाओगे ? 

अन्तराल से जो रीते
मन के संवेग जगाओ तुम 
फिर आकर उसको , उसके
आँगन से लेकर जाओ तुम

गोमती नगर , लखनऊ (उ0 प्र0)

कवियत्री


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