नए साल पर 5 कवितायें -साल बदला है , हम भी बदलें
नया साल , नयी उम्मीदें नए सपने , नयी आशाएं ,नए संकल्प और नए संघर्ष भी | नए साल पर …
नया साल , नयी उम्मीदें नए सपने , नयी आशाएं ,नए संकल्प और नए संघर्ष भी | नए साल पर …
यूँ तो प्यार का कोई मौसम नहीं होता | परन्तु आज हम एक ऐसे प्रेम की मोहक गाथा ले कर …
चढ़े हाशिये पर सम्बोधन ठहरी शब्द-नदी।। चुप्पी साधे पड़े हुए हैं कितने ही प्रतिमान यहाँ अर्थहीन हो चुकी समीक्षा सोई …
पिता , बस दो दिन पहले आपकी चिता का अग्नि-संस्कार कर लौटा था घर …. माँ की नजर में खुद …
हाथों में मेहँदी, पाँव में आलता और मांग में ,सिन्दूरी आभा लिए खड़ी है दुल्हन देहरी पर आँखों से गालों …
अनजान बेचैनियों में लिपटे, मेरे ये इन्तज़ार के लम्हें तुम्हें आवाज़ देना चाहते हैं.. पर मेरा मन सहम जाता …
गुनगुनी धूप में—————— खुले बाल तेरा छत पे टहलना, एक खूबसूरत एहसास है। मै तकता हू एकटक तुम्हे चोर नज़र, …
वेग से बह रहा समय, उम्र कटती जा रही है । विरह की बह रही नदी, सब्र घटता जा रहा …
बाबा कितने दिन , महीने बरस बीत गए जब बांधा था तुमने ये अटूट बंधन एक अपरिचित अनजान से और …
इंतजार करती है———– अपने कोठे पे बैठ हर शाम कोई ग्राहक। न आने पे फिर वहीं से खोलती है, जहा …
मुस्लिम हो गई———– मुझ ब्राह्मण के गोद की वे बातूनी लड़की। एक वालिद सा मेरा ख़याल रखती थी, आज आई …
“रेशमा” महज़ एक लड़की नही बल्कि वे मुझ जैसे किसी शायर की मुहब्बत थी————— तेरे शहर में———– आज रात मै …
कितने जंगल काटे हमनेकितने वृक्ष गिराए हैंनीड़ बिना बेघर पंक्षीमौसम ने मार गिराए हैंकितने—चारों ओर कोलाहल भारीजहर घुल गया सांसों …
आज हम ले कर आये हैं बच्चों के लिए पांच बाल् कवितायें , तो खोलिए चुनमुन का पिटारा और लीजिये …
चाय की दुकान पे———- सुट-बूट वाले साहब के, अधरो पे सुलगते सिगरेट का कश है, उस फैले धुँऐ में तेरह …
मैं नन्हीं – सी प्यार की मूरत हूँ |मैं भविष्य की छिपी हुई सूरत हूँ || मेरे मुस्कराने से कलियां …
काव्य जगत में प्रस्तुत हैं अन्तरा करवड़े की पाँच कवितायें | जिनमें कुछ में लयात्मकता है तो कुछ गद्य की …
रोज़ ही सामने होता है कुरुक्षेत्र, रोज़ ही मन मे होता है घमासान, रोज़ ही कलम लिख जाती है, कुछ …
कर्ण और कुंती दो पात्रो पर लिखी ये महज़ कविता नही अपितु बेगुनाह कर्ण के वे आँसू है जो बिना …