जीवित कामायनी
इंतजार करती है———– अपने कोठे पे बैठ हर शाम कोई ग्राहक। न आने पे फिर वहीं से खोलती है, जहा …
इंतजार करती है———– अपने कोठे पे बैठ हर शाम कोई ग्राहक। न आने पे फिर वहीं से खोलती है, जहा …
मुस्लिम हो गई———– मुझ ब्राह्मण के गोद की वे बातूनी लड़की। एक वालिद सा मेरा ख़याल रखती थी, आज आई …
“रेशमा” महज़ एक लड़की नही बल्कि वे मुझ जैसे किसी शायर की मुहब्बत थी————— तेरे शहर में———– आज रात मै …
चाय की दुकान पे———- सुट-बूट वाले साहब के, अधरो पे सुलगते सिगरेट का कश है, उस फैले धुँऐ में तेरह …
कर्ण और कुंती दो पात्रो पर लिखी ये महज़ कविता नही अपितु बेगुनाह कर्ण के वे आँसू है जो बिना …
रंगनाथ दुबे जी की ये कविता प्रसिद्ध ठुमरी गायिका गिरिजा देवी को भावभीनी श्रद्धांजलि है | विगत २४ अक्टूबर को …
बाॅलीवुड———- नरगिस और राज कपुर का अलगाव है, गुरुदत्त की ख़ुदकुशी है, तो घुट-घुट के दुनिया से विदा हुई—— मीना …
दिवाली पर एक हास्य-व्यंग्य—- (लम्बी चटाई के पटाखे की तरह हूँ) पति ———– डम्प पड़े पटाखे के घाटे की तरह …
करवा चौथ की सभी व्रती महिलाओ के प्यार की एक खूबसूरत कविता—- (प्यार का चाँद) हमने पाया है तुममे अपने …
आदरणीय भारतीय प्रधानमंत्री की खुले मे शौच मुक्त भारत का एक काव्यात्मक समर्थन————- बिटिया खुले मे शौच जाती है _____________________ …
रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)। मै पंडित नही———— तेरी मस्जिद का अजा़न, और तेरी बस्ती का जुलाहा हूँ। देख लेता हूँ सारे …
रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश) आज म्याँमार से भगाये गये लाखो लाख रोहिंग्या मुसलमान इतने शरीफ़ और साधारण नागरिक वहाँ के नही …
रचयिता—-रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर(उत्तर-प्रदेश) तुम भी अब स्वर्ण-भस्म और शीलाजीत सी——- कोई दवाई खाओ—राधे माँ। बर्दाश्त नही हो रहा आशाराम और …
रंगनाथ द्विवेदी। शर्मिंदा हूं—————- सुनूंगा घंटो कल किसी गोष्ठी में, उनसे मै हिन्दी की पीड़ा, जो खुद अपने गाँव मे, …
रंगनाथ द्विवेदी। जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर(उत्तर-प्रदेश)। आज की तारीख़ का सबसे मुफिद और त्वरित फायदेमंद अगर कोई धंधा है तो वे …
रंगनाथ द्विवेदी। जौनपुर (उत्तर-प्रदेश)। जब बेचैन कर देता है———— मेरे अंदर का मरुस्थल मुझको, तब मै लिखने बैठता हूँ कोई …
रंगनाथ द्विवेदी बाबाओ को गदराई दैहिकता ललचा रही———– औरत इन्हें भी हमारी तरह भा रही। सारे प्रवचन भुल रहे, बिस्तर …