समाज में बढ़ते नैतिक अवमूल्यन के लिए कौन जिम्मेदार है ?

समाज में नैतिक अवमूल्यन जारी है \ वक्त आ गया है की हम अपनी जिम्मेदारी समझे व् सुधर का प्रयास करें

समाज में  बढ़ते नैतिक अवमूल्यन के लिए कौन जिम्मेदार है ?


  आज हर व्यक्ति जो थोडा बहुत भी भावनात्मक है,देश की इस हालत से चिंतित है,भारतीय समाज का नैतिक अवमूल्यन क्रमोत्तर हो रहा है.देश में चारो ओर अराजकता है।  किसी भी तरफ नज़र उठा कर देख लीजिये चोरी,डकैती,राहजनी,हत्या,बलात्कर जैसे अपराध अपने अपराधी अट्टहास कर रहे हैं.  पर इसका उत्तरदायी कौन है? वर्तमान राजनीति,पोंगा पंडितो,हर छोटी बड़ी बात में फतवा देने वाले मौलवी,अकर्मण्य सरकार या देश समाज की शोचनीय स्थिति से बेफिक्र आज का युवा ? 

समाज में  बढ़ते नैतिक अवमूल्यन के लिए हम भी हैं  जिम्मेदार 


सच तो ये है की हम सब बराबर के ज़िम्मेदार हैं . हम रोज शिकायत करते हैं कि अपराध बढ़ रहे हैं , भ्रष्टाचार बढ़ रहा है , बुराई बढ़ती जा रही है प्रतिदिन एक बँधे हुए ढर्रे की तरह हम नित्य ही इस संबंध में टीका-टिप्पणी करते हैं, कभी सरकार को दोष देते हैं तो कभी प्रशासन व्यवस्था को । कभी किन्हीं व्यक्तियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। इस तरह की शिकायतें एक सामान्य व्यक्ति से लेकर उच्च-स्थिति के लोगों तक से सुनी जा सकती हैं। लेकिन कभी हमने यह भी सोचा है कि इनके लिए हम स्वयं कितने जिम्मेदार हैं। हम भूल जाते हैं कि बहुत कुछ अपराध, बुराइयाँ हमारे व्यावहारिक जीवन में अपने प्रयत्नों का परिणाम हैं। हमारे अनीतिपूर्ण जीवन, सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उपेक्षा, हाथ धरे बैठ जाने की प्रवृत्ति से ही बुराइयों को प्रोत्साहन मिलता है।

समाज में होने वाले अपराधों पर चुप्पी तोडिये 


 कई बार किसी नागरिक पर बदमाश लोगों के आक्रमण को देखकर भी हममें से बहुत लोग चुपचाप आगे पग बढ़ा देते हैं। हममें से कइयों की जानकारी में रिश्वत का दौर चलता रहता है। कई बार जानते हैं कि सार्वजनिक कार्यों में ठेकेदार तथा नौकरशाही अनावश्यक लाभ उठा रहे हैं। हममें से बहुत से लोग धोखाधड़ी, ठगी, चोरबाजारी, मिलावट करने वालों को भारी भली-भाँति जानते हैं किन्तु यह सब जानकर हम इनका भंडा फोड़ नहीं करते। इनकी शिकायत पुलिस को या अपराध निरोधक संस्थाओं को नहीं करते। इनके खिलाफ संगठित होकर आँदोलन नहीं होता। यदि हम इनके लिए स्वयं को उत्तरदायी मानकर अपना सुधार करने में लगें, अपने कर्तव्यों को समझने लगें तो कोई संदेह नहीं कि बुराइयाँ घटने लगें और एक दिन समाप्त भी हो जायँ। 


            हम नहीं चाहतें कि कोई हमारा अपमान करे तो हमारा भी कर्तव्य है कि हम किसी का अपमान न करें। इसी तरह विश्वासघात, छल, कपट, धोखाधड़ी उत्पीड़न, शोषण नहीं होना चाहते तो हमारा भी धर्म है कि हम दूसरों के साथ ऐसा न करें। लेकिन खेद है कि जब कोई हमारे ऊपर अत्याचार करता है हम बुराई की, सिद्धान्तों, की, दुहाई देते हैं और केवल बचाव के लिए गुहार मचाते हैं किंतु जब हम स्वयं दूसरों के साथ ऐसा करते हैं तब किसी के कुछ कहने सुनने पर वे हमारे कान पर जूँ तक नहीं रेंगती और यही कारण है कि बुराइयां दिनों दिनों बढ़ती जाती हैं। हम उनकी शिकायतें, करने, आलोचना करने, में ही अपना काम पूरा समझ लेते हैं। 
        इस सम्बन्ध में हमारी यह शिकायत हो सकती है कि “आजकल कोई सुनता नहीं, ” जो इस तरफ के कदम उठाता है उसे ही उल्टी परेशानियां उठानी पड़ती हैं।

 बहुत कुछ अंशों में यह ठीक भी है। किसी बात की सूचना देने पर गुँडे के बजाय सूचना देने वाले को ही गिरफ्तार कर लिया जाता है। बुराई का प्रतिरोध करने वाले को दूषित तत्वों का कोप-भाजन बनना पड़ता है। यह सब ठीक है किंतु बिना कोई खतरा उठाये दूर तो नहीं किया जा सकता। सुधार के लिए एक ही मार्ग है, वह है सब तरह के खतरे उठाकर बुराइयों का मुकाबला करना। यदि प्रशासन इस सम्बन्ध में ढील दे तो उसके खिलाफ भी आवाज उठायी जाये। कई सरकारी कर्मचारी या समाज का सदस्य ही दूषित तत्वों का बचाव करे इन्हें प्रोत्साहन दें तो उनकी भी आलोचना करने में नहीं चूकना चाहिए। 

समाज में  बढ़ते नैतिक अवमूल्यन  को रकने के लिए सिद्धांतों न रचें  कर्म करें 


       हमारी एक सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि हम बड़े-बड़े सिद्धान्त बघारते हैं, नीति और न्याय की ऊँची-ऊँची बातें करते हैं, लेकिन यह सब दूसरे के लिए। अपने कार्यकलापों को न्याय, नीति की कसौटी पर हम बहुत ही कम कसते हैं। एक दुकानदार बाजार में बैठकर सरकार, पुलिस आदि के भ्रष्टाचार की जी खोलकर आलोचना करता है किन्तु उसकी आलोचक वृत्ति उस समय गायब हो जाती है जब वह वस्तुओं में मिलावट करता है, ग्राहकों को कम तौलता है, अधिक मुनाफा वसूल करता है। आतताई और गुँडों को हम लोग कोसते हैं, उन्हें बुरा कहते हैं किन्तु हमारी समीक्षात्मक बुद्धि उस समय जाने कहाँ चली जाती है। जब हम पराई स्त्री को बुरी निगाह से देखते, बिना प्रति, मूल्य देय समाज के साधनों का उपभोग करते हैं, अनीति के साथ धन एकत्रित करते हैं, दूसरों के श्रम अधिकार एवं साधनों का अनुसूचित शोषण करते हैं।



        भारत का हर नागरिक भारतवर्ष की दुर्दशा में बराबर का सहभागी है.हमारी मुश्किल ये है की अगर हम स्वयं को सज्जनों की श्रेणी में रखते हैं तो दुर्जनों की संगत से बचने के चक्कर में किसी भी प्रकार की दुर्जनता का विरोध नहीं करते और यदि दुर्भाग्यवश हम दुर्जन की श्रेणी में हो तब तो हमारा एक ही ध्येय होता है ‘दूसरो को येन केन प्रकारेण दुखी करना’.अर्थात दोनों ही श्रेणियों के लोगो को देश और समाज की स्थिति से कुछ लेना देना नहीं.यही स्थिति दुखदायी है और इसी प्रवृति ने हमें विनाश की ओर अग्रसर किया है.हमारे आस पास कुछ भी होता रहे हम बस अपने में मगन रहते हैं.मैं,मेरा परिवार,मेरे बच्चे,मेरा घर...... ये सुखी रहे तो हम सुखी हैं.हमारी चिंताए अपने परिवार तक ही सीमित हैं पर जब देश की विपन्नता हम पर सीधे प्रभाव डालती है तो हम चीत्कार करने लगते हैं,राजनीति और प्रशासन को दोष देने लगते हैं.देश की राजनैतिक,आर्थिक,सामाजिक और प्रशासनिक प्रत्येक तरह की व्यवस्थाएं न सिर्फ सुधरे बल्कि सुद्रण भी हो इसके लिए हमें अपने चारो ओर घट रही घटनाओ पर संज्ञान लेना होगा.हर अन्यायपूर्ण व्यवस्था का पुरजोर विरोध करना होगा.और कुछ नहीं तो निर्भीक हो कर तेज आवाज में अपनी राय स्पष्ट करनी होगी.पर सच ये है की हम ऐसा करने की बजाय कभी व्यावहारिक होने का हवाला दे कर और कभी अपने आम आदमी होने का हवाला दे कर अपने कर्तव्यों से तो बचना चाहते हैं और फिर अपनी सुविधानुसार हम अपने आम आदमी के अधिकारों के लिए रोना शुरू कर देते हैं.यदि हर बार अपने अधिकारों के लिए रोते रहना अव्यवहारिक नहीं तो अपने कर्तव्य पालन करना भी व्यावहारिक है,हमें समझना होगा. परन्तु कौन से कर्तव्यों के पालन से हम एक जागरूक समाज की स्थापना कर सकते हैं ये भी समझना होगा.वास्तव में ये बहुत छोटे छोटे कर्त्तव्य हैं-

पालन करें कुछ सामान्य नागरिक कर्तव्यों का 


  •  राह चलते किसी को हमारी मदद की जरुरत हो तो हम जल्दी होने का बहाना न बना कर उसके लिए रुक कर उसकी मदद को हाथ बढ़ाएं,
  • किसी लड़की के साथ छेड़खानी की घटना होते देखे तो छेड़छाड़ करने वालो को चार पांच थप्पड़ लगाने में न डरे,
  • किसी बुजुर्ग का अपमान न करें न होने दे,राहजनी की घटना के प्रत्यक्षदर्शी बने तो मूक बधिर न बने रहे,
  • जब भी मौका मिले बेईमानो को अपमानित करें,श्रम और मेहनत करने वालो का सम्मान करें,
  • कम से कम एक बच्चे को शिक्षित करें,
  • हर बरसात में कम से कम ५ पेड़ लगायें,
  • सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर किसी प्रकार का कचरा न फैलाएं और न दूसरो को फ़ैलाने दें,,,,,

  •  क्या इन सब कर्तव्यों के पालन में बहुत ऊर्जा लगती है?या ये सब न करके हम अमरत्व को प्राप्त करने वाले हैं?यदि नहीं तो फिर डर और झिझक कैसी? आइये इन छोटे-छोटे कर्तव्यों का पालन करें और बड़े-बड़े अधिकारों को स्वतः प्राप्त करें.

नैतिक अवमूल्यन के लिए कुछ इस तरफ भी सोंचें 



 कभी कोई दामिनी कभी कोई गुड़िया ऱोज बल्कि हर घंटे रौंदी जाती हैं, उनके सिर्फ शरीर ही घायल नहीं होते बल्कि उनकी आत्माएं भी मरणासन्न होती हैं.जनता विलाप करती है,सरकार सख्त कार्यवाही का आश्वासन देती है.
हम बढ़ते हुए इन अपराधो के लिए सरकार को जिम्मेदार मानते हैं और सरकार में बैठे मानसिक नपुंसकता से लोग अपनी सुविधा के अनुसार जनता के अलग अलग वर्गों को जिम्मेदार ठहरा देते हैं. कोई कहता है यू.पी. और बिहार वाले जिम्मेदार हैं,
किसी की राय में टी.वी. और फिल्मे और किसी की राय में मोबाइल फोन जिम्मेदार हैं.

इस क्रम में कई हास्यास्पद बयान भी आते हैं,जैसे दुष्कर्म के लिए स्कर्ट और जीन्स जिम्मेदार हैं या ४० वर्ष से कम उम्र की महिलाओ के मोबाइल फ़ोन रखने और अकेले बहार जाने पर पाबंदी होनी चाहिए.

कुछ बयान बेशर्म भी होते हैं जैसे “ऐसे अपराध तो होते रहते हैं,इन पर काबू नहीं पाया जा सकता.” ऐसे बलात्कारो और उसके बाद जुबानी बलात्कार करने वालो की मानसिकता के लिए निःसंदेह कई सतही कारण मौजूद हैं पर मेरे विचार से जो सबसे बड़ा मूल कारण है वो है अशिक्षा. 

भारतीय समाज के तेजी से हो रहे नैतिक पतन और सांस्कृतिक क्षरण के लिए अशिक्षा ही मूल रूप से उत्तरदायी है.ऐसा भी नहीं कि शिक्षित समाज में महिलाओं के यौन शोषण नहीं होते परन्तु वहशीपन और दरिंदगी की साडी हदे पार करने वाले अपराधी अधिकतर अशिक्षित समाज से ही आते हैं.उत्तर प्रदेश और बिहार में ऐसे अपराध अधिक होने का कारण वहां फ़ैली अशिक्षा ही है.


आज समाज दोहरा चरित्र जी रहा है, जिसमें एक तरफ़ तो महिलाओं के सम्मान की बात की जा रही है और दूसरी ओर टी.वी., इंटरनेट, फिल्में जैसे संचार माध्यम समाज के सामने औरत की जो तस्वीर पेश कर रहे हैं, उसमें उसे सिर्फ़ भोग्या एवं मनोरंजन की वस्तु के रुप में ही दिखाया जां रहा है | 


समाज में नैतिकता एवं उच्च मानवीय आदर्शों का भी दिन-प्रतिदिन अवमूल्यन हो रहा है | इन परिस्थितियों में सिर्फ़ मृत्युदंड का भय दिखाकर इस तरह की घटनाओं को रोकना संभव नही है | समाज में उच्च नैतिक मूल्यों एवं आदर्शों की स्थापना करके ही अपराधों पर अंकुश लगाया जां सकता है |
संपर्क -हरकीरत 'हीर'
 सुंदरपुर
 गुवाहाटी-  (असम )

लेखिका

यह भी पढ़ें ...........





आपको आपको  लेख " समाज में  बढ़ते नैतिक अवमूल्यन के लिए कौन जिम्मेदार है ?" कैसा लगा  | अपनी राय अवश्य व्यक्त करें | हमारा फेसबुक पेज लाइक करें | अगर आपको "अटूट बंधन " की रचनाएँ पसंद आती हैं तो कृपया हमारा  फ्री इ मेल लैटर सबस्क्राइब कराये ताकि हम "अटूट बंधन"की लेटेस्ट  पोस्ट सीधे आपके इ मेल पर भेज सकें | 

COMMENTS

Name

15 अगस्त 26जनवरी agla kadam anger astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial biography BIRTH cancer children issues christmas clingy behaviour competition Creativity dating tips decision deepawali special E.book emotional management examination series family and relationship issues father's day fb feeling lost friendship day general article ghost Go Grey green GST guru happy new year health hindi divas hindi poetry hindi stories id immortal personalities inferiority complex interview janmashtami karm karvachauth karwaan law of karma literary articles louis braille love memoirs mental health mind set mising tile mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru negative new peace personality development pollution positive positive thinking power of words pragnency raksha bandhan rape Regret religion reviews Riya speaks sarahah app satire science fiction self satisfaction senior citizen issues short stories social articles SOULMATE spiritual articles story stress eating success sucesses sucesses stories swantantrta divas tension to-do-list train tree valentine day vandana bajpai warren buffett women issues year resolution अकेलापन अक्षत शुक्ला अक्षय तृतीया अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अंजू शर्मा अटल बिहारी बाजपेयी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अनन्य गौड़ अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अनूप शुक्ला अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तराष्ट्रीय हास्य दिवस अन्तर्राष्ट्रीय खुशी दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अन्नदा पाटनी अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अप्रैल फूल अमृता प्रीतम की जीवनी अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अविनीश त्रिपाठी अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा खरे आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आराधना सिंह आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंतजार इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ऐब्युसिव रिश्ते ओपरा विनफ्रे ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर कमलेश मिश्रा करवाचौथ कर्म कर्मका सिद्धांत कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कविता विकास कहानियाँ कहानी कहानी संग्रह कारवाँ फिल्म समीक्षा कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह किस्सा टाइम्स कु. शान्ति पाल ‘प्रीति’ कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर क्रिसमस क्लास टेंथ क्षितिज संस्था गंगा ग़ज़ल गणतंत्र दिवस गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गाय ग़ालिब गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गीतांजलि एक्सप्रेस गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चरित्रहीन चार्ली चैपलिन चिट्ठी चीन चेतन भगत चॉकलेट केक छठ छाया सिंह जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जल जिनपिंग जी एस टी जीवन जीवनी जे के रोलिंग जैन ज्योति पाठक ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे टेंशन ट्रेन ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डेजी नेहरा डेटिंग टिप्स डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.अलका अग्रवाल डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तरसेम कौर तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा तोहफा त्यौहार दशहरा दहेज़ प्रथा दीपक मित्तल दीपक शर्मा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दीप्ति दुबे दीप्ति निगम दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश गान धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नया साल नव वर्ष नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी नितिन मेनारिया निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी न्यू इयर रेसोल्युशन पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय पतंग पद्मा मनुज परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्यावरण पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रतियोगिता प्रथम पोस्ट प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रमिला श्री तिवारी प्रिया मिश्रा प्रिंसेस डायना प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फेसबुक की दोस्ती फॉरगिवनेस फ्रेडरिक नीत्से फ्रेंडशिप डे बच्चों से बातचीत बहादुर शाह जफ़र बहु बाइबल बाबु लाल बाबुल बाबू लाल बाबूलाल बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बुद्ध पूर्णिमा बेगम अख्तर बेटी ब्रेल लिपि ब्लू व्हेल ब्लैक डॉट भगवन बुद्ध भगवान् भाई - बहन भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मनीषा जैन मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महाशिवरात्रि महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता माता -पिता मानव शरीर माया एंजिलो माया मृग मालिनी वर्मा मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मृत्यु मृदुल मेंटल हेल्थ मैत्रेयी पुष्पा मोनिका शर्मा यकीन रक्षा बंधन रंगनाथ दुबे रंगनाथ द्विवेदी रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि रविजा रश्मि सिन्हा राजगोपाल सिंह वर्मा राजगोपाल सिंह वर्मा की कवितायें राजा सिंह राज़ी -फिल्म समीक्षा राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा राम रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रिश्ते नाते रीता गुप्ता रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रेल रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लता मंगेशकर लप्रेक लली लिव इन रिलेशन लुइ ब्रेल लेख लेबर डे वंदना वंदना गुप्ता वंदना दुबे वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनय कुमार सिंह विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व गौरैया दिवस विश्व जल संरक्षण दिवस विश्व पर्यावरण दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वृद्धजन विमर्श वैलेंटाइन डे वॉरेन बफे व्यक्तिव विकास व्यंग शब्द शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शहीद दिवस शांति पुरोहित शादी शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीदेवी श्रीमती एम डी त्रिपाठी सकारात्मक चिंतन सकारात्मक सोंच सक्सेस स्टोरीज संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' संदीप माहेश्वरी सद्विचार संध्या तिवारी सन्यास सपना मांगलिक सपने सफलता सफाई समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा संवेदनशीलता संस्मरण साक्षात्कार साड़ी साधना सिंह साधु सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सिनीवाली शर्मा सीताराम गुप्ता सीमा असीम सीमा सिंह सुकून सुधा गोस्वामी सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुबोध मिश्रा सुमित्रा गुप्ता सुरेन्द्र कुमार अरोड़ा सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सुहागरात सूफी रूमी सूर्य सूर्योदय सेंटा क्लॉज सेल्फ केयर सेल्फी सोनी पाण्डेय सोलमेट स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री लेखन स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हरकीरत 'हीर' हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हीन भावना हेडी लेमार हेल्थ होली होली की ठिठोली
false
ltr
item
अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को : समाज में बढ़ते नैतिक अवमूल्यन के लिए कौन जिम्मेदार है ?
समाज में बढ़ते नैतिक अवमूल्यन के लिए कौन जिम्मेदार है ?
समाज में नैतिक अवमूल्यन जारी है \ वक्त आ गया है की हम अपनी जिम्मेदारी समझे व् सुधर का प्रयास करें
https://1.bp.blogspot.com/-X2y0o8KD034/Whg1eg-DUMI/AAAAAAAAICE/pbcutya18nkaiUSL5jnG3mdsgVHVfiP1QCLcBGAs/s320/pocket-watch-2031021_960_720.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-X2y0o8KD034/Whg1eg-DUMI/AAAAAAAAICE/pbcutya18nkaiUSL5jnG3mdsgVHVfiP1QCLcBGAs/s72-c/pocket-watch-2031021_960_720.jpg
अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को
http://www.atootbandhann.com/2017/11/samaj-mein-naitik-avmulyan-hindi.html
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/2017/11/samaj-mein-naitik-avmulyan-hindi.html
true
1089704805750007414
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy