अध्यात्मिक गुरु टील स्वान का बचपन बहुत बुरा बीता ....पर इसी ने उन्हें खुद को समझने का मौका दिया | आज वो कहती है दुःख केवल हमें कुछ शिक्षा देने आते हैं | आइये जाने आधुनिक आध्यात्मिक गुरु टील स्वान के 21 विचार



आधुनिक आध्यात्मिक गुरु -टील स्वान


टील स्वान एक लेखिका वक्ता और सोशल मीडिया स्टार हैं |  वो लोगों को जीवन के विभिन्न पहलुओं के बारे में बताती कर उनके व्यक्तित्व को परिमार्जित करने का प्रयास करती हैं | उनका मुख्य उद्देश्य लोगों को ये सिखाना है कि वो कैसे अपना भावनात्मक , शारीरिक , मानसिक और आध्यात्मिक विकास कर सकते हैं | इसके लिए वो देश विदेश की यात्रा भी करती हैं , उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखी हैं | यहाँ हम टील स्वान के कुछ विचारों का हिंदी अनुवाद दे रहे हैं | आशा है जीवन को समझने में आपको सहायता मिलेगी |


टील स्वान के 21 अनमोल विचार 



1)आप कितनी भी कोशिश करें आप अँधेरे को नहीं हटा सकते | क्योंकि अँधेरे को हटाने के लिए ये समझना जरूरी है कि अँधेरा कहीं है ही नहीं | दरअसल प्रकाश का आभाव अँधेरा है | इसलिए अँधेरे को हटाने के स्थान पर कोशिश प्रकाश को लाने की होनी चाहिये |


2)अगर आप किसी चीज से भावनात्मक रूप से अलगाव चाहतें हैं तो चाहें कितनी भी कोशिश करे यह संभव नहीं होगा | इसके लिए आपको उसमें खुद को देखना या खुद से जोड़ना बंद करना होगा .... भावनात्मक अलगाव खुद ब खुद हो जाएगा |

3)रिश्ते ही हमारी ख़ुशी का सबसे बड़ा कारण होते हैं और रिश्ते ही हमारे दुःख का सबसे बड़ा कारण होते हैं | रिश्तों में दुःख तब शुरू होते हैं जब हम ये उम्मीद करने लगते हैं की दूसरा व्यक्ति हमें अपने विशेष व्यवहार से खुशियाँ प्रदान करे | जिस समय हम दूसरे व्यक्ति से अपनी खुशियों का कारण बनने को कहते हैं या चाहत हैं उसी समय से हम उस व्यक्ति की दया पर निर्भर हो जाते हैं | हम उम्मीद करते हैं कि वो हमारे द्वारा स्थापित ख़ुशी की परिभाषा के अनुसार जीवन जियें ना की अपनी मर्जी से | यही वो समय है जब हम उस रिश्ते को खोना शुरू कर देते हैं जो सबसे महत्वपूर्ण है ... यानि खुद से खुद का रिश्ता | 
आप का खुडी से रिश्ता जितना अच्छा होगा औरों से भी उतना ही अच्छा होगा | 


4)अविश्वास भी एक तरह का विश्वास ही है | फर्क बस इतना है कि अविश्वास की प्रकृति नकारात्मक है जबकि विश्वास की सकारात्मक |

5)किसी भी रिश्ते का सबसे बड़ा सच ये है कि आपुसके साथ कैसा महसूस करते हैं जब कोई देख न रहा हो |


6)आपकी कोई इच्छा नहीं होरही है , इसके दो ही कारण हो सकते हैं ...
१)आप अपने सोचने, विश्वास करने या काम करने में खुद ही कोई अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं |
2) वो आप की इच्छा है ही नहीं , उस इच्छा को पाने की कोशिश केवल अपनी असली इच्छा को छुपाये रखना , उस पर ध्यान ना देना है | क्योंकि ब्रह्माण्ड ये जानता है कि ये आपकी असली इच्छा नहीं है इसलिए वो कोई परिणाम नहीं देता |
पहले अपनी असली इच्छा को समझिये ... उस पर सोचने , विश्वास करने काम करने में कोई अवरोध मत पैदा करिए | तीनों में एक् लयात्मकता होनी  चाहिए |

आप पायेंगे , कुछ भी पाना असंभव नहीं है |


7)आज का आधुनिक समय ये तो वादा करता है कि आप स्त्री हैं फिर भी आप सब कुछ पा सकती हैं पर वो ये डिस्क्लेमर लगाना भूल जाता है कि आप सब कुछ करते हुए ही सब कुछ पा सकती हैं |

8)इससे ज्यादा ख़राब बात कोई नहीं है कि कोई स्त्री अपने लिए कमजोर पुरुष की कामना नहीं करती |


9)आपका असली चेहरा इस विचार के नीचे छुप गया है  है कि अगर आप अगर आप एक खास तरीके से नहीं चलेंगे तो आप वो प्राप्त नहीं कर सकते जो आप चाहते हैं | अपने को नकारना, एक आंतरिक मुखौटा है , जिसके नीचे आपका असली व्यक्तित्व  छुपा हुआ है | इसको पहचानने का सबसे अच्छा तरीका फीलिंग्स या भावनाएं हैं | ये एक तरह का कम्पास है | आप किस काम में कैसा महसूस कर रहे हैं | अगर आप अच्छा महसूस कर रहे हैं तो आप को कोई जरूरत नहीं है कि आप दूसरे लोगों की राय लें | लेकिन अगर आप वही कर रहे हैं जो दूसरे चाहते हैं तो आप खुद से अपने तार तोड़ रहे हैं ... इसकी शुरुआत भी अपनी भावनाओं को कुचलने से होती है | आप देखेंगे की आप पा तो बहुत रहे हैं पर खुश नहीं हैं |

आपकी भावनाएं आपकी खुशियों का पता बताती हैं |

10)लोग जो आप के अन्दर नकारात्मक इमोशन संप्रेषित करते हैं ....वो लोग मात्र सूचना वाहक है , आप के उन घावों के जो अभी तक भरे नहीं हैं | 

11)ख़ुशी बच्चों में तब तक व्याप्त रहती है , जब तक बड़े आकर उन्हें ख़ुशी के किसी  जटिल संस्करण से अवगत नहीं कराते हैं और उन पर अपनी बात स्वीकार करने का दवाब नहीं बनाते हैं |

12)हम धरती पर अलगाव के एक भ्रम को जीने आये हैं , लेकिन अगर हम इस बारे में जागरूक हो जाते हैं तो हम इस सारी  प्रक्रिया को उल्टा कर सकते हैं | अगर ध्यान से देखें तो हम सब इस प्रकार बने हैं कि हम दर्द का अवरोध कर ख़ुशी ढूँढें | जब भी दर्द होता है हम ख़ुशी की तलाश में घूमने लगते हैं | ये उस दर्द का अवरोध है एक ऐनालजेसिक (पेन  किलर ) है | जो दर्द को कुछ समय को दबा तो देता है पर खत्म नहीं करता | अगर हम अपने सेंसर इस तरह से रखे कि दर्द आते ही हम उसे समझने की कोशिश करें न कि भागने की , तो हम पायेंगे कि दर्द से ज्यादा प्रेरणादायक कुछ नहीं है |दर्द का अवरोध कर हम अपने आत्म विस्तार का अवरोध करते हैं | हर दर्द ये बताता है कि कुछ बदलाव जरूरी है पर उसे समझने के स्थान पर उस सेंसर को ही नाश करने पर तुले रहते हैं |

बेहतर है आप अपना नरक देखने की हिम्मत करें , क्योंकि यहीं से आपके स्वर्ग का रास्ता खुलेगा या फिर नरक को ही स्वर्ग समझने के भरम में जीते रहिये |


13)आप अपना हाथ पकडाए बिना किसी का हाथ नहीं पकड़ सकते |


14)नकारात्मकता को नकारने के लिए सकारात्मकता का इस्तेमाल मत करिए |


15)हम मनुष्य अपने जीवन को देखकर कर सोचते हैं कि हम में कुछ तो गलत है | फिर हम संसार के हर कोने में जाकर ( शारीरिक रूप से ना सही , अध्यन व् जानकारी के तौर पर ) पता करने की कोशिश करते हैं कि हममे क्या गलत है | ये जानने के बाद कि हम में क्या गलत है हम संसार भर में जा कर पता करते हैं कीसे कैसे ठीक करें | लेकिन कोई फायदा नहीं होता | फिर हम संसार भर में जा कर पता करते हैं कि आखिर ये उपाय क्यों काम नहीं किया | दरअसल केवल एक ही उपाय काम कर सकता है ... वो है ये समझ कि हममें कुछ गलत है |

हमें बदलने की नहीं ये समझने की जरूरत है |

16)पूर्ण विश्वास केवलज्ञान के आभाव में ही पनप सकता है |

17)अतीत को पकडे रहना हमेशा दुःख का कारण है .... भले ही वो अतीत बहुत खुशनुमा क्यों न हो |

18) लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन सही है | लेकिन आपकी किसी इच्छा को आप तक आने में जो बफर टाइम है उस्कसाही सदुपयोग जरूरी है | कोई चीज जो दूसरे डाईमेंशन में है उसे आप केवल उसके बारे में सोचकर यूँही नहीं खींच सकते | आप अगर उस बफर टाइम में हर समय नेगेटिव इमोशन में घिरे रहते हैं तो उसका पास आना और मुश्किल है | आपको करना क्या है .... बस छोटी छोटी खुशियों और पॉजिटिव इमोशन में रहना हैं , यही वो रस्सी है जो उसे खींचेगी | 

इसलिए अपनी पहली प्राथमिकता उन वस्तुओं को बनाइये जो पॉजिटिव इमोशन को उत्पन्न  करती हैं |

19)अहंकार ज्ञान को एक ढाल , एक , तलवार और एक बचाव के कम्बल की तरह इस्तेमाल करता है |

20)हम केवल ये कह सकते हैं कि कोई अनुभव अच्छा या बुरा था , जब तक हम ये नहीं समझ लेते की उस अनुभव का हमारे विकास में क्या योगदान था |

21)एक बार मुझसे एक बहुत ही अच्छा सवाल पूंछा गया | सवाल था , " हम सही निर्णय कैसे लें |जवाब है , " मैं अपने दिल के दरवाजे किसी चीज के लिए बंद नहीं करूंगा |

फोटो क्रेडिट -टील स्वान फेसबुक पेज
अगर आप टील स्वान के और विचारों को जानना चाहते हैं तो आप उनकी किताब The Anatomy of loneliness पढ़ सकते हैं या फिर teal swan की साईट पर जाकर उनके विचारों को और अधिक जान सकते हैं |


टीम -अटूट बंधन

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filed under- motivational quotes, teal swan
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Atoot bandhan

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2 comments so far,Add yours

  1. बहुत ही अच्छे विचार हैं ...
    सच है की मन का वहम है अँधेरा ... उसे हटाना सिर्फ प्रकाश को लाने से ही संभव है ...
    शुक्रिया इन नवीन वोचारों को प्रेषित करने का ...

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