वंदना बाजपेयी
कुम्हार और बदलते व्यापार का समीकरण
दीपावली की बात करते ही मेरे जेहन में बचपन की दीवाली आ जाती है | वो माँ के हाथ के …
मंगतलाल की दिवाली
हम सब वायु , ध्वनि , जल और मिटटी के प्रदूष्ण के बारे में पढ़ते हैं … पर एक और …
वो कन्नौज की यादगार दीपावली
यूँ तो हर बार दिवाली बहुत खास होती है पर उनमें से कुछ होती हैं जो स्मृतियों के आँगन में …
अदृश्य हमसफ़र -अव्यक्त प्रेम की प्रभावशाली कथा
“अदृश्य हमसफ़र ” जैसा की नाम से ही प्रतीत होरहा है किये एक ऐसी प्रेम कहानी …
करवाचौथ -पति -पत्नी के बीच प्रेम की अभिव्यक्ति का विरोध क्यों ?
करवाचौथ आने वाला है , उसके आने की आहट के साथ ही व्हाट्स एप पर चुटकुलों की भरमार हो गयी …
#Metoo से डरें नहीं साथ दें
#Metoo के रूप में समय अंगडाई ले रहा है | किसी को ना बताना , चुप रहना , आँसू पी …
#metoo -सोशल मीडिया पर दिशा से भटकता अभियान
सबसे पहले तो आप सब से एक प्रार्थना जो भी अपना दर्द कह रहा है चाहे वो स्त्री हो , …
ब्यूटी विथ ब्रेन – एक जेंडर बायस कॉम्प्लीमेंट
ब्यूटी विथ ब्रेन …. स्त्रियों को दिया जाने वाला एक आम कॉम्प्लीमेंट है जिसे बहुत ख़ास माना जाता है | …
संवेदनाओं के इमोजी
फेसबुक पर भावनाओं को व्यक्त करने के लिए तरह तरह के इमोजी उपलब्द्ध हैं , हंसने के …
अनुभूतियों के दंश- लघुकथा संग्रह (इ बुक )
लघुकथा वो विधा है जिसमें थोड़े शब्दों में पूरी कथा कहनी होती है | आज के समय में जब समयाभाव …
देहरी के अक्षांश पर – गृहणी के मनोविज्ञान की परतें खोलती कवितायें
कविता लिखी नहीं जाती है , वो लिख जाती है , पहले मन पर फिर पन्नों पर ….एक श्रेष्ठ कविता …
हसीनाबाद -कथा गोलमी की , जो सपने देखती नहीं बुनती है
अभी कुछ दिन पहले गीताश्री जी का उपन्यास ” हसीनाबाद” पढ़ा है | पुस्तक भले ही हाथ में नहीं है …
फिर से कैसे जोड़े दोस्ती के टूटे धागे
हमारे तमाम रिश्तों में दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं , इसलिए इसे हमें खुद ही …
क्या फेसबुक पर अतिसक्रियता रचनाशीलता में बाधा है ?
लाइट , कैमरा ,एक्शन की तर्ज पर लाइक , कमेंट ,एडिक्शन …. और दोनों ही ले …
मैं मेहनत के पैसे लेता हूँ , मदद के नहीं
अमीर लोगों का दिल कई बार बहुत छोटा होता है और गरीबों का बहुत बड़ा | ऐसे नज़ारे देखने को …
गुरु पूर्णिमा : गुरूजी हम बादल तुम चन्द्र
गुरु पूर्णिमा एक ऐसा त्यौहार है | जब हम अपना स्नेह गुरु के प्रति व्यक्त कर सकते हैं | …
आखिर निर्णय लेने से घबराते क्यों हैं ?
सुनिए , आज मीरा के घर पार्टी में जाना है , मैं कौन सी साड़ी पहनूँ | …
बॉर्डर वाली साड़ी
बेटियाँ पराया धन होती हैं | मायके पर उनका अधिकार शादी के बाद खत्म हो जाता है …. लेने का …