रितु गुलाटी की लघुकथाएं
दोष ———– रात के दस बज रहे थे।हम खाना खा कर टहलने निकले थे कि बाहर पडोस मे कुछ शोर …
दोष ———– रात के दस बज रहे थे।हम खाना खा कर टहलने निकले थे कि बाहर पडोस मे कुछ शोर …
हिजड़ा वह दैहिक सम्बन्धों से अनभिज्ञ एक युवक था । उसके मित्रजन उसे इन सम्बन्धों से मिलने वाली स्वार्गिक आनन्द …
सीमा जो मात्र 14 साल की रही थी ,बैठ कर सील रही है अपनी इज्जत की चुन्नी को आशुओं की …
वो बेटी ही थी | और शादी के बाद बहू बन गयी | • सर पर पल्ला रखो ~ अब …
नेहा नाहटा,जैन दिल्ली माला फेरकर जैसी ही प्रेरणा ने आँखे खोली,सामने खड़ी बेटी और पतिदेव ठहाके मारने लगे । मान्या …
===माँ === बच्चा , सुबह विधालय के लिए निकला और पढ़ाई के बाद खेल के पीरियड में ऐसा रमा कि …
डॉ मधु त्रिवेदी जुम्मे – जुम्मे उसने बारह बसंत ही देखे थे कि पति ने परस्त्री …
तुम्हारा क्या … दिन भर घर में रहती हो … कोई काम धंधा तो है नहीं … यहाँ बक बक …
राधा आटा गूंधते गूंधते बडबडा रही थी ” पता नहीं क्या ज्योतिष पढ रखी है इस आदमी ने हर बात …
त्रिपाठी जी और वर्मा जी मंदिर के बाहर से निकल रहे थे । आज मंदिर में पं केदार नाथ जी …
कुमार गौरव मौलिक एवं अप्रकाशित एक छुट्टी के दिन कोई पत्रकार कुछ अलग करने के ख्याल से जुगाड़ लगाकर ताजमहल …