मतलब

सुनो , “ये करवाचौथ के क्या ढकोसले पाल रखे हैं तुमने ?” कहीं व्रत रखने से भी कभी किसी की …

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मूल्य

रद्दी वाले ने रख दिए मेरे हाथ में 150 रुपये  और पीछा करती रहीं मेरी भरी हुई आँखें  और निष्प्राण …

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रम्भा

आदरणीय दीपक शर्मा जी कथा बिम्बों को किसी उपमा के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए जब कहानी बुनती हैं तो …

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नींव

             दुनिया के सारे घरों की नींव में दफ़न औरतें भी देखती हैं कंगूरे बनने …

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ढलवाँ लोहा

आज आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं सशक्त कथाकार दीपक शर्मा जी की कहानी “ढलवाँ लोहा “| ये कहानी 2006 …

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प्रथम गुरु

अक्सर ऐसा कहा जाता है कि बालक की प्रथम गुरु उसकी माता होती है परंतु मैं इस बात से सहमत …

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