स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर – जब आप खाना खा रहे हो और खाना आपको

कई बार तब हम भोजन में अपनी समस्याओं का समाधान ढूँढने लगते हैं जब भावनाएं हमें  खा रही होती हैं – अज्ञात  “देखिये आप बिंज ई...



कई बार तब हम भोजन में अपनी समस्याओं का समाधान ढूँढने लगते हैं जब भावनाएं हमें  खा रही होती हैं – अज्ञात 


“देखिये आप बिंज ईटिंग डिसऑर्डर से बुलुमिया नेर्वोसा की तरफ बढ़ रही हैं अब अगर आप खाने से दूर नहीं रहीं तो ये खाना आपको खा जाएगा “कहते हुए डॉक्टर ने मुझे दवाइयों और देखभाल की लंबी – चौड़ी  फेहरिशत  पकड़ा | मैं निराशा से भरी डॉक्टर के केबिन से बाहर निकली | मुझे देख कर बाहर बैठी दो लडकियां मुस्कुरा दी | एक ने चुटकी ली ,” अगर ये अपना खाना कम कर दे तो देश की खाने की समस्या काफी हद तक खत्म हो जायेगी | उसके बाद हंसी के ठहाके  काफी देर तक मेरा पीछा करते रहे और मैं साडी के पल्लू से अपने भीमकाय शरीर को ढकने का असंभव  प्रयास करती रही | आप की जानकारी के लिए बता दूं की मेरी उम्र ३६ साल कद पांच फुट दो इंच और वजन पूरे ९० किलो | यानी 100 से बस १० कम | मेरा स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर का इलाज़ चल रहा है | क्योंकि मैं खाने से दूर नहीं रह पाती | अच्छा बुरा मैं कुछ भी खाती हूँ |यहाँ  तक की कुछ न मिलने पर मैं कच्चा आलू भी कहा लेती हूँ |  मैं तनाव में खाती हूँ और खाने की वजह से उपजे तनाव में और खाती हूँ | खाने  से मेरा ऐसा लगाव पहले नहीं था | माँ कहती हैं  ,” मैं बचपन में कुछ नहीं खाती थी , वो बुलाती रह जाती थीं और मैं खेल में इतनी मगन की सुनती ही नहीं | खाना ठंडा हो जाता तो एक दो कौर खा कर माँ अच्छा नहीं लग रहा है कह कर भाग जाती | कई बार माँ के डर लंच में दिया खाना सहेलियों को खिला देती या स्कूल के  डस्टबिन में फेंक आती , ताकि वो मुझे डांट न सके | फिर कब कैसे मैं इतना ज्यादा खाने लगी और खाना मुझे खाने लगा ? यादों के झरोखों से देखती हूँ तो वो दिन याद आता  है  जब रितेश से मेरी शादी हुई थी , न जाने कितने अरमान ले कर मैं इस घर में आई थी |
पर यहाँ आते ही  मुझे रितेश  की दो बातें सख्त नापसंद लगी | एक तो उनका शराब पीना और दूसरा अपनी सेकेट्री से  जरूरत से ज्यादा घनिष्ठता |और रितेश को ... रितेश को तो शयद मैं पसंद ही नहीं थी | उसने घर वालों के कहने पर मुझसे शादी की थी | कुछ दिन तक तो मैं सहती रही फिर मैंने विरोध करना शुरू किया | पर उसका उल्टा असर हुआ | रितेश और उग्र होते गए उनकी शराब की मात्र व् सेकेट्री को दिया जाने वाला समय बढ़ने लगा | मैं दुःख में अपने प्रति लापरवाह सी रहने लगी | सहेलियों ने कहा तू  बन ठन  कर रहा कर | उसका कुछ असर तो हुआ रितेश मेरी बात को थोडा बहुत सुनने लगे | मैंने सासू माँ से भी रितेश के बारे में बात की | उनके समझाने पर रितेश मेरे पास आये और अपने स्नेह का चिन्ह मेरे माथे पर अंकित कर के बोले,” आज से मैं सिर्फ तुम्हारा “ उन्होंने  मुझसे वादा किया की अगले दिन से वो जल्दी घर आयेंगे व् खाना मेरे साथ ही खायेंगे |



                            अंधे को क्या चाहिए दो आँखें |और मैंने तो आँखों में अपने व् रोहित के सुनहरे भविष्य के न जाने कितने ख्वाब एक पल में पाल लिए |  मैं इतनी खुश थी की पूछो मत | उसने जो - जो कहा था , मैंने खाने में वो सब कुछ बनाया   | सब कुछ उसकी पसंद का ...मटर पनीर , पुलाव , दम आलू की सब्जी और खीर | | कांच के डोंगों में डाईनिग टेबल पर सजा भी दिया | साथ में सजा दिया अपना नन्हा सा दिल | फिर खुद तैयार होने लगी |ये रात मेरी शादी के बाद की पहली रात से भी हसीं जो होने वाली थी | मैंने गुलाबी साडी बिंदी और गुलाबी ही चूड़ियाँ पहनी | फिर आईने में अपने को ही देख कर लजा सी गयी | यूँ ही नहीं मेरी सहेलियां मुझे हीरोइन कह कर बुलाती थी | रंग , रूप , कद काठी सब कुछ परफेक्ट | सहेलियां रस्क करती ,” यार तुझ पर तो मोटापा चढ़ता ही नहीं “ एक हम हैं कमर का कमरा बन गया | सोंचते ही मेरे चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी , अगले ही पल गहरी उदासी छा गयी | आखिर क्या है उस सेकेट्री के पास की रोहित ऑफिस से इतनी लेट आते हैं वो भी शराब पी कर | और उसके बाद रितेश , रितेश नहीं रहते , जानवर हो जाते है | कितनी बार मैंने रितेश से शिकायत की की मेरे हिस्से में  ये जंगली और सेकेट्री के हिस्से में रितेश , ऐसा क्यों ?  फिर खुद ही मन को समझाया  ,” अरे पगली , आज क्या दुखी होना | आज तो तेरे जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है | आज से रितेश समय पर घर आएगा , शराब भी नहीं पिएगा और सेकेट्री ... उसे तु छुएगा भी नहीं | मन के सूर्य पर छाए बादलों को मैंने अपने विचारों से ही दूर किया और रितेश की प्रतीक्षा करने लगी | १० , 11 , १२ .. एक बजे रितेश आये  | उनके पास से आती शराबकी महक  साथ ही लेडीज परफ्यूम की तीखी गंध मिल कर मेरी दुनिया को विषैली , जहरीली बदबू से भर रही थी , मैं खुद को काबू में न रख सकी | मैं चिल्लाने लगी , रितेश , रीइते ते ते श , तुमने अपना वादा तोड़ दिया , तुम आज जल्दी  आने वाले थे , मेरे साथ खाना खाने वाले थे और .... तुमने मेरे सारे हक़ उसको दे दिए | तुम कभी नहीं सुधर सकते कभी नहीं | रितेश  ने लडखडाते क़दमों से आगे बढ़ते हुए कहा ,” तो क्या हुआ अब दे देता हूँ तुम्हे तुम्हारा हक़ | रितेश  ने डाईनिग टेबल से खाना उठा कर मुँह में ठूसना शुरू किया , कुछ फैला कुछ मुँह में गया और कुछ कपड़ों पर , फिर रितेश को जाने क्या सूझी डोंगों से निकल कर कुछ खाना जमीन पर डालना शुरू किया और कुछ मेरे मुँह पर | फिर मुझे उठा कर बिस्तर पर ले गए .... और फिर मेरे आंसुओं के बीच पति पत्नी का रिश्ता भीगने  लगा | अब तो मिल गया तुझे तेरा हक़ , अब तो खुश मुँह पोंछते हुए कह कर रितेश गहरी नींद में डूब गए | मैं घंटों बिस्तर पर टूटी बिखरी पड़ी रही | तन से मन से और भावनाओं से अपमानित | इतना गह्ररा दर्द की मैं सह ही नहीं पा रही थी | मायके में माँ नहीं थी भाभी पिताजी की तो देखभाल हज़ार तानों के साथ कर रही थी मेरी मौजूदगी में वो भी न करेंगी | मैं कहाँ जाऊं | मैं हिम्मत कर के उठी | मैंने डाईनिंग रूम में आकर जमीन पर बैठ गयी | चारों  तरफ खाना फैला पड़ा था और मैंने कल सुबह से कुछ खाया नहीं था | खाने को देख कर मन में एक विरक्ति सी उठी | अगले ही पल अपने से घृणा हुई | ये खाना .. ये खाना ... इस खाने के लिए ही तो ये सब अत्याचार सह रही हूँ | बस मुझे खाना चाहिए , खाना चाहिए अपमान से भरा हुआ ही क्यों न हो , कहते हुए मैं जमीन से उठा कर खाना खाना शुरू कर दिया , फिर डाई निंग टेबल पर रखा हुआ भी | मैं खाती  गयी , खाती गयी जब तक सारा खाना खत्म नहीं हो गया | आश्चर्य की उसके बाद मुझे कुछ अच्छा फील हुआ |





उस दिन के बाद मैं अपनी संतुष्टि खाने में ढूँढने लगी | इधर मेरा फ़ूड इंटेक बढता जा रहा था , उधर मेरी कमर | जैसे – जैसे मैं मोटी होती जा रही थी वैसे – वैसेमुझे अपने आप से नफ़रत  बढती  जा रही थी | और ये विश्वास भी की इसी लायक तो थी मैं | मेरे बढ़ते मोटापे से रितेश को फायदा हुआ | उन्होंने अपनी सेकेट्री के साथ बिताया जाने वाला समय बढ़ा दिया , हां शराब जरूर कम कर दी थी | अब जब कोई उन्हें सेकेट्री को छोड़ने को कहता तो उनके पास जवाब होता ,” इस हथिनी के साथ कोई कैसे निभाये “ इतने मोटापे की वजह से तो ये माँ भी नहीं बन सकती | लोग भी हाँ ! में सर हिला देते | पर मुझे अब कोई परवाह नहीं थी | जैसे नन्हा शिशु अपनी माँ के स्तन में अपने हर दर्द का इलाज़ खोज लेता है मैंने भी खाने में अपने हर दर्द का इलाज़ खोज लिया था | मेरी सेल्फ एस्टीम इतनी कम थी की मुझे लगता था की मैं किसी के प्यार के लायक ही  नहीं हूँ , मैं  सिर्फ खाने के लिए जी रही हूँ | शायद  मैं यूँ ही खाते – खाते मर जाती | पर जब मुझे हाइपर टेंशन की वजह से चक्कर आ गया और काम वाली के बताने पर पड़ोस की भाभी जी मुझे डॉक्टर को दिखाने ले गयीं | तब मुझे पता चला की ये एक बिमारी है जिसे बिंज ईटिंग डिसऑर्डर कहते हैं | इसीलिए मेरा वजन बढ़ रहा है | डॉक्टर को दिखाने का असर ये हुआ की अब मैं खाना तो खाती थी पर पर खाने के तुरंत बाद अँगुली मुँह में डाल  कर उलटी करती ताकि कोई कैलोरी मुझे न मिले | मुझे लगता था की मैं सही कर रही हूँ पर डॉक्टर ने बताया की मेरी बिमारी एक स्टेप आगे बढ़ गयी है और मैं बुलुमिया नेर्वोसा की शिकार हो रही हूँ | इस बार उन्होंने मनो चिकित्सक को भी रेफर किया था | पर मैंने उसे न दिखाने का निर्णय लिया | मेरा तर्क था ,” आखिर जीना चाहता ही कौन है ? तब भी पड़ोस की भाभी जी ने ही समझाया था ,” मरना तो  है ही , जी के देखो , क्यों न रितेश को दिखाने की सोंचों की तुम इतनी सक्षम हो  की तुम्हे उसकी जरूरत भी नहीं है | पर , मैं रितेश से प्रेम भी करती हूँ ,मैंने बात बीच में ही काटी बस वो मेरे पास लौट आये | मुझे पता है पर रितेश जैसे पुरुष प्रेम से नहीं अहंकार चूर होने से लौटते हैं कर के तो देखो | रितेश लौटेगा | अभी कितनी जिंदगी तुम्हारी बाकी पड़ी है | अभी कितने सुनहरे अध्याय  लिखे जा सकते हैं | उठो , जिंदगी की कमान अपने हाथ में तो लो | वो कहती जा रही थी और मैं ग्रहण करती जा रही थी | बात मेरे मन में पैठ गयी | मैं मनो चिकित्सक के पास जाने को तैयार हो गयी | वहां खुद को कमतर मानना , कम आत्म विश्वास , अपने बारे में दूसरे की राय का ज्यादा महत्व देना आदि न जाने कितनी ग्रथियाँ खुलती गयी और घुलती गयी मेरी देह की चर्बी | मैंने मन को ठीक किया , योग क्लास ज्वाइन की , खाने पर नियंत्रण शुरू किया ... और चमत्कार दिखने लगे |
               मैंम आप को तो मॉडल होना चाहिए था , एक बच्ची ने गुलाब का फूल देते हुए कहा तो मेरी तन्द्रा टूटी | आज मैं एक एक बच्चे की माँ हूँ ,स्कूल के बच्चों की फेवरेट  अध्यापिका हूँ और मेरी द्रण इच्छा शक्ति को देख कर अब रितेश भी मेरे आगे पीछे घुमते हैं | पर ये सब पाने के लिए मुझे अपने मन को बहुत ठीक करना पड़ा | अगर आप भी मेरी तरह बिंज ईटिंग का शिकार हैं या तनाव के समय जरूरत से ज्यादा खा  जाते हैं , या तकलीफों के दौर में खाना खाना आपको सुकून देता है तो आप भी ये समझिये | क्योंकि जब तक आप खाते जा रहे हैं और वजन बढाते जा रहे हैं तब तक तो आप को समझ नहीं आता , पर खाने पर नियंत्रण करते ही आपको समझ आने लगती  हैं अपनी  मानसिक ग्रंथियाँ | जरूरी है की उन्हें एक – एक करके तोड़े .....



खुद को स्वीकार करें
                 किसी भी प्रक्रिया को शुरू करने से पहले सोंचे आप प्यार के काबिल हैं , आप सफलता के काबिल हैं आप तारीफ़ के काबिल हैं | जैसी भी हैं आप अच्छी हैं | आप के बस कुछ किलो बढ़ गए हैं जिन्हें आप को कम करना है | जैसा की मेरे केस में हुआ मैं रितेश को पसंद  क्यों नहीं आती | आखिर मुझमें कमी क्या है ? कमी कमी सोंचते – सोंचते मैं तनाव में भर गयी और समाधान भोजन  में ढूँढने लगी | फिर इतनी मोटी हो गयी की अपने से ही नफ़रत करने लगी | अपने को स्वीकार करना बहुत जरूरी है | मैं जैसी हूँ  अच्छी हूँ | इस बढे हुए वजन के बावजूद जब मैंने खुद से प्यार करना शुरू किया तो लोगों का नजरिया मेरे प्रति बदलता गया | क्योंकि जब आप खुद को स्वीकार करते हैं तब ही खुश रहते हैं | तभी आप परिवर्तन की प्रक्रिया से गुज़र सकते हैं |
यह कोई जादुई छड़ी नहीं है
                       स्ट्रेस ईटिंग पर नियंत्रण कोई जादुई छड़ी नहीं है की आप ने घुमाई और हो गया | आप दिन में कई बार खाना खाते हैं | आप को हर बार ध्यान देना पड़ता है की आप हेल्दी ही खाए | आपको व्यायाम पर ध्यान देना होता है | और सबसे ज्यादा उन भावनाओं पर जो आपको और ज्यादा खाने पर मजबूर करती हैं | इसलिए जब ऐसे भावनाएं उठे या मन आहत हो तो खुद पर नियंत्रण करने के लिए आपको उन भावनाओं से डरने के स्थान पर अपने अंदर गहरे उतरना होता है | मेडीटेशन करना होता है | तब आप जीत की और बढ़ सकती हैं |
अपनी तुलना दूसरों से मत करिए  
                    जैसा की मेरे केस में हुआ , मैं हर समय अपनी तुलना रितेश की उस सेकेट्री से करती रहती की आखिर उसमें क्या ख़ास है जो रितेश उसके प्रति आकर्षित हैं | बन संवर कर आईने में अगर कभी खुद को खूबसूरत भी लगती तो तुरंत अपनी कमियाँ ढूँढने लगती , शायद मेरी नाक , मोटी है या होंठ उतने पतले नहीं आदि – आदि | यहाँ तक की धीरे – धीरे मैं दुनिया की हर औरत से अपनी तुलना करने लगी | और सब मुझे अपने से बेहतर लगती | उनके पति उन्हें प्यार जो करते थे | अगर आप भी ऐसा करते हैं तो अपनी इस आदत पर लगाम लागाइये | ये एक कभी  न खत्म होने वाला खेल है | दरसल हम दूसरे की जिंदगी टुकड़ों में देख रहे होते हैं और अपनी पूरी | हो सकता है उनका केवल वही टुकड़ा बेहतर हो जो हमने देखा है | रितेश की सेकेट्री देखने में भले ही मुझसे सुन्दर हो पर खाना बनाने , घर की देखभाल व् बड़ों की इज्ज़त करने के मामले में कहीं बहुत पीछे थी | ये बात मुझे तब समझ नहीं आई थी | मैं अपने और गुणों को निखारने के स्थान पर केवल सुन्दरता पर अटक कर रह गयी थी | हालांकि ये बात बाद में खुद रितेश को भी समझ आई | दूसरों से तुलना एकदम व्यर्थ है | हर कोई अपनी लड़ाई खुद लड़ रहा है | और हमें अपनी जिन्दगी की लड़ाई पर फोकस करना है | खुद को कमतर समझ कर नहीं बेहतर समझ कर |




खाने से आपका रिश्ता जिंदगी से आपके रिश्ते का प्रतिबिम्ब है
                          खाने से आपका क्या रिश्ता है वो आपकी जिंदगी से आपका क्या रिश्ता है बताता हैं , आपका अन्य लोगों से क्या रिश्ता है , खुद से क्या रिश्ता है सब बताता है |
·         अगर आप जल्दी – जल्दी खाते हैं – आप जिंदगी में बहुत कुछ पाना चाहते हैं | आपके पास अनेकों लक्ष्य हैं | जिन्हें आप जल्दी – जल्दी पूरा करना चाहते हैं | वो ही जल्द बाजी खाने की मेज पर भी दिखती है |
·         अगर आप बहुत चुन – चुन कर खाते हैं और भोजन पर  पूर्ण नियंत्रण रखते हैं तो आप अपनी जिन्दगी के उसूलों को मानने में रिजिड है और बदलाव पसंद नहीं करते हैं |
·         अगर आप जरूरत से ज्यादा खाते हैं तो आप अपने जीवन में अकेलापन महसूस कर रहे हैं | व् उस कमी को भोजन के माध्यम से पूरा करना चाहते हैं |
·         अगर आप जरूरत से  बहुत कम खाना खाते हैं  तो कहीं न कहीं आप अवसाद के शिकार हैं या आप परफेक्ट बॉडी इमेज पाने के रोग से ग्रस्त हैं |
·             हमारा खाने के साथ जैसा रिश्ता है उस रिश्ते को सुधारते ही जिंदगी के साथ रिश्ता भी सुधरता जाता है | क्योंकि जब हम अपने शरीर की उपेक्षा करते हैं तो हम अपनी उपेक्षा करते हैं |
परफेक्ट बनने  की जल्द्बाजी नहीं करिए
                           जब आप अपनी फ़ूड हैबिट  सुधारने का प्रयास करना शुरू करते हैं तो आप जल्दी से जल्दी परफेक्ट होना चाहते हैं | परन्तु ये इतनी जल्दी संभव नहीं | उस समय रोज शीशे में खुद को देख कर कोसने के स्थान पर कहिये की मैं अपूर्ण ही खूबसूरत हूँ | ये अपूर्णता भी तो ईश्वर ने ही बनायी हैं | जरा सोचिये अगर हर चीज परफेक्ट होती तो दुनिया में कोई विकास ही न हो रहा होता | किसी भी क्षेत्र में अपूर्णता है  तो विकास की सम्भावना है , विकास है तो  लक्ष्य है, लक्ष्य है तो मन लगा हुआ है ... और मन का रम जाना ही तो जीवन है | तो फिर गलतियां करिए ... कभी  फ़ूड चार्ट पालन नहीं कर पाए , चलता है | कभी व्यायाम रह गया , चलता है  , कभी ज्यादा सो लिए , चलता है | ये सब वैसा ही है जैसे कभी – कभी भाई बहन में झगडा हो जाता , कभी – कभी कोई चैप्टर बिना पड़े exam देने पहुँच जाते वैसे ही अब ये फ़ूड चार्ट है जिसे  थोड़ी  बहुत गलतियों का स्ट्रेस लिए बिना फॉलो करना है |

आध्यात्मिकता की ओर
              जब भावनाए आपको खाने लगती हैं तब आपको अहसास होता है की ये शरीर की बिमारी नहीं हैं | चोट अंदर कहीं गहरे लगी है और हीलिंग भी कहीं गहरे जा कर होगी | आपको अपने ही मन की गहराई में उतरना होता है | ये अलग – अलग हो सकता है ... कहीं खुद की उपेक्षा , कहीं अपमान , कहीं बचपन के घाव तो कहीं बंद दायरे | जब आप अपने दर्द की जाँच जांच – पड़ताल शुरू करते हैं तब आप आध्यात्मिक होते जाते हैं | क्योंकि आप जान जाते हैं की कुछ भावनाएं कितनी बलवती होती हैं की आपके दिमाग को कब्जे में कर के रोगग्रस्त कर सकती हैं | तब आप मन और विचारों के सम्बन्ध को समझ जाते है तथा हर विचार पर विचार करने लगते हैं की इसे कितनी देर मन में ठहराया जाए | मन के बस में आते ही ईटिंग डिसऑर्डर को उड़नछु  होते देर नहीं लगती |
                   “ सही खाइए स्वस्थ रहिये “

रियल स्टोरी – mrs . xx मेरठ
लेखिका – वंदना बाजपेयी

                        
अगला कदम के लिए आप अपनी या अपनों की रचनाए समस्याएं editor.atootbandhan@gmail.com या vandanabajpai5@gmail.com पर भेजें 
#अगला_कदम के बारे में 
हमारा जीवन अनेकों प्रकार की तकलीफों से भरा हुआ है | जब कोई तकलीफ अचानक से आती है तो लगता है काश कोई हमें इस मुसीबत से उबार ले , काश कोई रास्ता दिखा दे | परिस्तिथियों से लड़ते हुए कुछ टूट जाते हैं और कुछ अपनी समस्याओं पर कुछ हद तक काबू पा लेते हैं और दूसरों के लिए पथ प्रदर्शक भी साबित होते हैं |
जीवन की रातों से गुज़र कर ही जाना जा सकता है की एक दिया जलना ही काफी होता है , जो रास्ता दिखाता है | बाकी सबको स्वयं परिस्तिथियों से लड़ना पड़ता है | बहुत समय से इसी दिशा में कुछ करने की योजना बन रही थी | उसी का मूर्त रूप लेकर आ रहा है
" अगला कदम "
जिसके अंतर्गत हमने कैरियर , रिश्ते , स्वास्थ्य , प्रियजन की मृत्यु , पैशन , अतीत में जीने आदि विभिन्न मुद्दों को उठाने का प्रयास कर रहे हैं | हर मंगलवार और शुक्रवार को इसकी कड़ी आप अटूट बंधन ब्लॉग पर पढ़ सकते हैं | हमें ख़ुशी है की इस फोरम में हमारे साथ अपने क्षेत्र के विशेषज्ञ व् कॉपी राइटर जुड़े हैं |आशा है हमेशा की तरह आप का स्नेह व् आशीर्वाद हमें मिलेगा व् हम समस्याग्रस्त जीवन में दिया जला कर कुछ हद अँधेरा मिटाने के प्रयास में सफल होंगे

" बदलें विचार ,बदलें दुनिया "



COMMENTS

नाम

“मतवाला” #NaturalSelfi 15 अगस्त २६ जनवरी अंजू शर्मा अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस अंतर्राष्ट्रीय बिटिया दिवस अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अकेलापन अक्षय तृतीया अखिल राज शाह अगला कदम अजय कुमार अजय कुमार श्रीवास्तव अजय कुमार श्रीवास्तव (दीपू) अजय चंद्रवंशी अटूट बंधन अटूट बंधन अंक -१० अनुक्रमाणिका अटूट बंधन कवर पेज अटूट बंधन विशिष्ट रत्न सम्मान अटूट बंधन सम्पादकीय अनामिका अनामिका चक्रवर्ती अनुपमा सरकार अन्तर करवड़े अन्तराष्ट्रीय वृद्ध जन दिवस अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) अपर्णा परवीन कुमार अपर्णा साह अम्बरीष त्रिपाठी अरविन्द कुमार खेड़े अर्चना नायडु अर्चना बाजपेयी अर्जुन सिंह अर्थ डे अशोक कुमार अशोक के परुथी आत्महत्या आध्यात्मिक लेख आभा दुबे आयुष झा "आस्तीक " आलोक कुमार सातपुते आशा पाण्डेय ओझा आसाढ़ पूर्णिमा इंजी .आशा शर्मा इंदु सिंह इमरान रिजवी इमोशनल ट्रिगर्स ई बुक ईद उत्पल शर्मा "पार्थ" उपवास उपासना सियाग उमा अग्रवाल उम्मीदें उषा अवस्थी एकता शारदा एम्पैथी ओमकार मणि त्रिपाठी ओशो औरत कंगना रानौत कंचन पाठक कंचन लता जायसवाल कबीर करवाचौथ कर्म कल्पना मिश्रा बाजपेयी कवि मनोज कुमार कविता बिंदल कहानी कहानी संग्रह कार्ल मार्क्स काव्य जगत काव्यजगत किरण आर्य किरण सिंह कु. शान्ति पाल ‘प्रीति’ कुमार गौरव कुसुम पालीवाल कृष्ण कुमार यादव कैंसर ग़ज़ल गणेश चतुर्थी गहरा दुःख गाँधी जयंती गिरीश चन्द्र पाण्डेय गीता गुरु गुरु दक्षिणा गुरु पूर्णिमा गुस्सा चंद्रेश कुमार छतलानी चन्द्र प्रभा सूद चन्द्र मौली पाण्डेय चीन चेतन भगत छठ जन्माष्टमी जय कन्हैया लाल की जिनपिंग जी एस टी जैन ज्योतिष झगडे टफ टाइम टीचर टीचर्स डे ठुमरी समाज्ञ्री गिरजा देवी डाॅ.भारती गाँधी डिम्पल गौड़ 'अनन्या ' डिम्पल गौड़ 'अनन्या' डॉ . आशुतोष शुक्ला डॉ .जगदीश गाँधी डॉ .संगीता गाँधी डॉ अब्दुल कलाम डॉ अलका अग्रवाल डॉ जगदीश गाँधी डॉ भारती वर्मा बौड़ाई डॉ मधु त्रिवेदी डॉ रमा द्विवेदी डॉ लक्ष्मी बाजपेयी डॉ संगीता गांधी डॉ. भारती गांधी डॉ. भारती वर्मा बौड़ाई डॉ.जगदीश गाँधी डॉली अग्रवाल ढिंगली तरसेम कौर तीज तीन तलाक तृप्ति वर्मा त्यौहार दशहरा दहेज़ प्रथा दीपावली स्पेशल दीपिका कुमारी दीप्ति दीपेन्द्र कपूर दुर्गा अष्टमी देवशयनी एकादशी देश -दुनिया देश भक्ति की कवितायें धर्म नंदा पाण्डेय नन्हा गुरु नवरात्र नवीन मणि त्रिपाठी नागेश्वरी राव नारी निधि जैन निबंध निशा कुलश्रेष्ठ नीता मेहरोत्रा नीलम गुप्ता नेहा अग्रवाल नेहा नाहटा नेहा बाजपेयी पंकज प्रखर पंखुरी सिन्हा पंडित दीनदयाल उपाध्याय परिचर्चा -१ परिचर्चा -१ कवितायेँ पर्व त्यौहार पारदर्शिता पार्थ शर्मा पूनम डोंगरा पूनम पाठक प्रतिभा पाण्डेय प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’ प्रिंसेस डायना प्रिया मिश्रा प्रेम कवितायेँ प्रेम रंजन अनिमेष प्रेरक कथाएँ प्रेरक प्रसंग प्रेरक विचार फादर्स डे फीलिंग लॉस्ट फुंसियाँ फेसबुक फॉरगिवनेस फ्रेंडशिप डे फ्रेडरिक नीत्से बहादुर शाह जफ़र बाल कहानी बाल जगत बाल दिवस बाल मनो विज्ञान बाल-मन बिल गेट्स बीनू भटनागर बुजुर्ग बेगम अख्तर ब्लू व्हेल ब्लॉगिंग भाई - बहन भाई बहन भाग्य भावना तिवारी भोले बाबा मई दिवस मदर्स डे मम्मी महात्मा गाँधी महान व्यक्तित्व महेंद्र सिंह माँ माँ उषा लाल माँ सरस्वती माता - पिता माता -पिता मानव शरीर माया मृग मित्रता मित्रता दिवस मित्रता दिवस पर विशेष लेख मीना कुमारी मीना पाठक मीना पाण्डेय मुंशी प्रेमचन्द्र . कहानी मुकेश कुमार ऋषि वर्मा मृत्यु मृदुल यकीन रंगनाथ द्विवेदी रक्षा बंधन रचना व्यास रजनी भारद्वाज रमा द्विवेदी रश्मि प्रभा रश्मि बंसल रश्मि सिन्हा राजा सिंह राधा कृष्ण "अमितेन्द्र " राधा क्षत्रिय राधा शर्मा रितु गुलाटी रिया स्पीक्स रिश्ते रिश्ते -नाते रूचि भल्ला रूपलाल बेदिया रेप रोचिका शर्मा लघु कथाएँ लता मंगेशकर लली लेख लेबर डे वंदना गुप्ता वंदना बाजपेयी वसंत पंचमी विजयारतनम विनीता शुक्ला विनोद खनगवाल विभा रानी श्रीवास्तव विशेष दिवस विश्व हास्य दिवस विश्वजीत 'सपन ' वीणा वत्सल वीरू सोनकर वृद्धजन विमर्श वैलेंटाइन डे व्यंग शरद पूर्णिमा शशि बंसल शशि श्रीवास्तव शांति पुरोहित शान्ति पाल शान्ति पुरोहित नोखा शायरी शिक्षक दिवस शिखा सिंह शिव शिवलिंग शिवा पुत्र शिवानी कोहली शिवानी जैन शर्मा श्राद्ध पक्ष श्रीमती एम डी त्रिपाठी संगम वर्मा संगीता पाण्डेय संगीता सिंह "भावना " संजना तिवारी संजय कुमार अविनाश संजय कुमार गिरि संजय वर्मा संजय वर्मा "दृष्टी " संजीत शुक्ला संध्या तिवारी संवेदनशीलता संस्मरण सकारात्मक चिंतन सक्सेस स्टोरीज सतीश राठी सत्या शर्मा 'कीर्ति ' सद्विचार सन्यास सपना मांगलिक सफलता समीक्षा सरबानी सेनगुप्ता सराह सरिता जैन सविता मिश्रा साक्षात्कार साधना सिंह सामाजिक लेख सावन का पहला सोमवार साहित्यिक लेख सीताराम गुप्ता सीमा सिंह सुधीर द्विवेदी सुनीता त्यागी सुमित्रा गुप्ता सुशांत सुप्रिय सुशील यादव सूर्य सूर्योदय सेल्फ केयर स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर स्त्री देह और बाजारवाद स्त्री विमर्श स्मिता दात्ये स्मिता शुक्ला स्वतंत्रता दिवस स्वामी विवेकानंद स्वास्थ्य जगत स्वेता मिश्रा हरकीरत 'हीर' हलचल आस -पास हलचल आसपास हामिद हास्य योग हिंदी दिवस हेडी लेमार हेल्थ होली की ठिठोली aforestation agla kadam astrology atoot bandhan atoot bandhan cover page atoot bandhan editorial cancer children issues clingy behaviour deepawali special E.book family and relationship issues father's day fb feeling lost friendship day general article GST guru health hindi divas hindi poetry hindi stories hindi story id immortal personalities interview janmashtami karvachauth literary articles memoirs mother's day motivational quotes motivational stories nanha guru pollution positive thinking pragnency raksha bandhan rape religion riviews Riya speaks sarahah app satire senior citizen issues short stories social articles spiritual articles stress eating sucesses sucesses stories swantantrta divas valentine day vandana bajpai women issues
false
ltr
item
अटूट बंधन : स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर – जब आप खाना खा रहे हो और खाना आपको
स्ट्रेस ईटिंग डिसऑर्डर – जब आप खाना खा रहे हो और खाना आपको
https://3.bp.blogspot.com/-4OBQcH3y558/WdGFY23tCGI/AAAAAAAAGtE/kXZGFRYxvxMcPIShm1GVC4J2kR4H4gF-QCLcBGAs/s200/person-2248567_960_720.jpg
https://3.bp.blogspot.com/-4OBQcH3y558/WdGFY23tCGI/AAAAAAAAGtE/kXZGFRYxvxMcPIShm1GVC4J2kR4H4gF-QCLcBGAs/s72-c/person-2248567_960_720.jpg
अटूट बंधन
http://www.atootbandhann.com/2017/05/blog-post_41.html
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/
http://www.atootbandhann.com/2017/05/blog-post_41.html
true
1089704805750007414
UTF-8
Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy