एक खूबसूरत अहसास होती है जाड़े की गुनगुनी धूप | उसी धूप से गुनगुनी कवि की कल्पना का आनंद लें |

एक खूबसूरत एहसास है
गुनगुनी धूप में------------------ खुले बाल तेरा छत पे टहलना, एक खूबसूरत एहसास है। मै तकता हू एकटक तुम्हे चोर नज़र, पता ही नही चलता कि------------- तेरे पाँव तले छत की ज़मी है, याकि मखमली घास है। गुनगुनी धूप में------------ खुले बाल तेरा छत पे टहलना, एक खूबसूरत एहसास है। ये उजले से दाँत,गुलाबी से होठ,आँखो मे शर्म और हवा से बिखरे बालो का, अपनी नर्म-नाज़ुक सी अँगुलियो से हटाना, ये महज चेहरा नही---------- एक खूबसूरत चाँद है। गुनगुनी धूप में--------- खुले बाल तेरा छत पे टहलना, एक खूबसूरत एहसास है। हर्फ-दर-हर्फ मेरे अंदर समा रही, ये तेरी उजली ओढ़नी और सफेद सलवार, महज तेरे बदन से लिपटी, शरारत करती कोई सहेली नही, बलकि मेरी गज़ल और उसके बहर की---- एक खूबसूरत लिबास है। गुनगुनी धूप में------------- खुले बाल तेरा छत पे टहलना, एक खूबसूरत एहसास है। @@@कलके रोमांटिक धूप की रोमांटिक याद जो शायद आप सबो को अच्छी लगे। रचयिता-----रंगनाथ द्विवेदी। जज कालोनी,मियाँपुर जौनपुर।

कवि व् लेखक


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atoot bandhan

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4 comments so far,Add yours

  1. प्रेमरस से सराबोर मन को सुबासित करती सुंदर रचना। बधाई।

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  2. बहुत ख़ूब ...
    प्रेम का काजोल बैन जाए तो सब नज़ारे प्रेम का मौसम बन जते हैं ...

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  3. बहुत खूबसूरत रचना...वाह्ह्ह👌👌

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  4. अहसास की परतें खुलती हैं

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