अतीत से निकलने के लिए बदलें खुद को सुनाई जाने वाली कहानी

दुखद अतीत से निकलने के लिए जरूरी है कि हम खुद को सुनाई जाने वाली अतीत की दर्द भरी कहानी को बदल दें |

अतीत से निकलने के लिए बदलें खुद को सुनाई जाने वाली कहानी
           

मेरी जिंदगी की कहानी तब बदली जब मैंने खुद को सुनाई जाने वाली  अतीत की कहानी बदली

हम और हमारा मन इसका आयाम इतना विस्तृत है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती | हम किसी दूसरे से कितनी देर बात करते होंगे | घंटे दो घंटे पर खुद से दिन भर बोलते रहते हैं | ये बातचीत कभी खत्म ही नहीं होती | दिन भर , रात भर, यहाँ तक की सपनों में भी चलती ही रहती है | और हम इससे अनजान ये सोंचते रहते हैं की अपने से हम कुछ भी बोले  क्या फर्क पड़ता है | कहने वाले हम, सुनने वाले भी हम तो क्यों सोंच – सोंच कर बोले ? कौन है जो रूठ जाएगा |


पर हकीकत इसके उलट होती है |खासकर उनके लिए जिनका अतीत सुखद नहीं है |  अगर हम खुद को सुनाई जाने वाली कहानियों पर ध्यान नहीं देंगे तो हमारा वर्तमान रूठ जाता है | भविष्य रूठ जाता है | कैसे ? जब आप खुद को हर समय अपने अतीत के दर्द भरी कहानियाँ सुनाते रहते हैं तो वही दर्द आप की जिंदगी में फिर से आता रहता है |  कई बार आपने देखा होगा की दुखी लोगों की जिंदगी में सामान दुःख बार – बार आते रहते हैं | वो हैरान रहते हैं की समय और परिस्थिति बदलने के बाद भी हर बार उनके साथ ऐसा क्यों होता है | अगर आप भी उनमें से एक हैं तो क्या आप की इच्छा नहीं करती इसका कारण जानने की | इसका सीधा – सच्चा सा कारण है खुद को सुनायी जाने वाली कहानी |

 रीता की जिन्दगी और उसकी खुद को सुनाई जाने वाली कहानी

रीता ( उम्र ३६ वर्ष ) एक बैंक में काम करती है | दो बच्चों की माँ है | अपने पति व् बच्चों के साथ एक खुशहाल जिन्दगी जी रही है | पर शुरू से रीता की जिन्दगी ऐसी नहीं थी | बचपन से प्यार को तरसती रीता को हमेशा यही लगता था की वो प्यार के काबिल ही नहीं है | उसकी जिंदगी में खुशियाँ ही नहीं हैं और न आ सकती हैं |  उसकी जिंदगी तब बदली जब रीता ने खुद को सुनाई जाने वाली कहानी बदल दी |

 रीता अपने माता – पिता की एकलौती संतान थी | उसकी माँ ने उसके पिता से प्रेम विवाह किया था | परन्तु प्रेम विवाह में प्रेम शादी के एक साल बाद ही कपूर के धुएं की तरह उड़ गया |रीता छोटी ही थी | जब वो अपने पिता को अपनी माँ को रोज बात बेबात पीटते हुए देखती |  उसके पिता उसका भी ख्याल नहीं करते | गुस्से में चीखते माता – पिता और घंटों रोती  माँ ये उसके बचपन का सबसे सामान्य दृश्य था | एक दिन पिता की पिटाई से आजिज़ माँ ने उनसे अलग होने का फैसला कर लिया | पिता ने  उन्हें तलाक और पैसे देने से मना  कर दिया | माँ उसे लेकर घर से निकल आयीं | वो दिन भयंकर असुरक्षा के थे | नाना ने उन्हें अपने घर घुसने नहीं दिया | क्योंकि माँ ने उनकी मर्जी के खिलाफ शादी करी थी |

पर उसकी माँ ने हिम्मत नहीं हारी | उन्होंने जी तोड़ मेहनत करके कमाना शुरू किया | वो डबल शिफ्ट करती | उन्होंने रीता का नाम स्कूल में लिखवा दिया | रीता की पढाई तो शुरू हो गयी पर उसे माँ का प्यार नहीं मिलता | माँ जरूरत से जयादा व्यस्त थी |वो उसके किसी स्कूल फंक्शन , पेरेंट – टीचर मीटिंग , अवार्ड सेरेमनी में नहीं गयीं | मासूम  रीता खुद ही अपनी पढाई , होमवर्क  स्कूल ड्रेस का ध्यान रखती |  कभी – कभी ही उसे माँ के साथ रहने का मौका मिलता तब माँ इतनी निढाल होती की बात करने की इच्छा न जतातीं या अपने अतीत को याद कर रोती  रहती | जिससे रीता सहम जाती |पिता तो उनसे मिलने भी नहीं आते |  इन्हीं हालातों में रीता एक निराश , हताश , कुंठित लड़की के रूप में बड़ी हो गयी |


अतीत की वो कहानी जो रीता खुद को सुनाती

रीता अक्सर जब – तब अपने अतीत में चली जाती | जो भी उसके पास बैठा होता या अकेले होने पर अपने अतीत की कहानी सुनाती |कहीं न कहीं हर समय अतीत के दर्द को याद करने से उसके मन में ये निष्कर्ष निकलता .......

सारे पुरुष गंदे होते हैं | वो भरोसे के लायक नहीं होते | उसके पिता एक क्रूर व्यक्ति थे | पुरुष का असली चेहरा यही है | उसकी माँ ने उसे कभी प्यार नहीं दिया | वो भी कुछ हद तक खुदगर्ज थी | बस अपने काम में लगीं रहीं | या फिर वो शायद  प्यार के काबिल ही नहीं है | क्योंकि उसकी पिछली जिंदगी के अनुभव  ख़राब है इसलिए वो शायद कभी अच्छी माँ बन ही नहीं पाएगी | वो यूँ ही बिना प्यार दिए बिना प्यार मिले तडपती तरसी ही दुनिया  से जायेगी |

खुद को सुनाई इस कहानी का रीता के जीवन पर असर

रीता के अतीत की कहानी उसके भविष्य पर हावी होने लगी | रीता पढ़ – लिख कर अच्छी खासी नौकरी कर रही थी | यही समय था जब नीलेश रीता की जिन्दगी में आया | यूँ तो वोपुरुषों से दूर ही रहती क्योंकि उसे लगता वो प्यार के काबिल नहीं है | पर नीलेश  प्यार के दो शब्दों से रीता पिघल सी गयी | उसे लगा नीलेश उस से प्यार करके उस पर अहसान कर रहा है क्योंकि वो तो प्यार के लायक ही नहीं है |  परन्तु ये प्यार ज्यादा दिन  तक टिक न सका | नीलेश का ट्रांसफर हो गया | रीता घबरा गयी | पहली बार तो उसे अपने बारे में कुछ अच्छा अहसास हुआ था | भले ही थोड़े दिन का सही | रीता ने आनन् – फानन में नीलेश से शादी करने का फैसला कर लिया | रीता नीलेश के साथ शादी करके अपना घर द्वार , नौकरी सब कुछ छोड़ कर चेन्नई चली गयी |उसने भी अपनी माँ की ही तरह अपनी माँ से कंसल्ट करने की जरूरत नहीं  समझी | 

पर वहां नीलेश का अलग ही रूप दिखाई दिया | नीलेश बात – बात पर उस पर  गुस्सा करते , मारते , पीटते  कभी – कभी घर से निकाल देते | वो रात भर बाहर बैठी रहती | फिर सुबह बुला लेते | नीलेश घर के बाहर ताला लगा कर ऑफिस जाते |  एक साल के अन्दर रीता का दो बार फैक्चर हो गया | सीवीयर ऐनीमिया  हो गया | पर  क्योंकि वो अपनी नौकरी छोड़ कर आई  थी उसके पास पैसे नहीं थे की वो वापस माँ के पास आ सके | इस आशा में की नीलेश सुधर जाएगा वो हर दिन पीटती रही | उसकी कोख का पहला अंश भी इस मार – पीट की वजह से उसे दर्द  में छोड़ कर चला गया | शायद इस दर्द ने उसे साहस दिया | एक रात वो घर से भाग निकली | किसी से उधार  ले कर फोन किया और जैसे – तैसे माँ के पास वापस पहुँच पायी |


रीता गहरे अवसाद में चली गयी | उसकी खुद को सुनाई जाने वाली कहानी में एक दुखद अध्याय और जुड़ गया | वो घंटों सोंचती | उसके साथ तो ये होना ही था | इतिहास अपने आप को दोहराता है | वो प्यार के काबिल ही नहीं है |सही किया जो नीलेश इतनी मार पीट करते थे | वो इसी लायक है |

जब मनोचिकित्सक ने रीता को उसकी अतीत की कहानी बदलने को कहा



रीता की हालत दिन पर दिन बिगडती जा रही थी | माँ उसे मनोचिकित्सक  के पास ले कर गयीं | रीता घंटों रो – रो कर अपनी कहानी सुनाती रही | उन्होंने ध्यान से सुना | करीब १० सेशन तक वो वाही कहानी सुनाती रही और मनोचिकित्सक सुनते रहे |

फिर उन्होंने रीता से कहा ,” आप की वही कहानी मैं बार – बार सुन रहा हूँ | अब कहानी जरा बदलिए |सोंचिये  ये सब कुछ आप के साथ नहीं आपकी सहेली के साथ हुआ है | जो आप की तरह स्वीट व् मासूम है | क्या वो डिजर्व करती है ऐसा जीवन | रीता आंसुओं को पोंछते हुए बोली ,” नहीं बिलकुल नहीं , वो क्या  कोई भी इंसान ऐसा जीवन डिजर्व नहीं करता |

तो फिर उसे क्या सोंचना चाहिए ये सोंचिये | गहरे , बहुत गहरे फिर उसे अपने पर रख कर मुझे आप ही बताइये ?मनोचिकित्सक ने रीता से कहा

थोड़ी देर सोंच कर रीता बोली ,” मुझे  अपने पिता को ये सोंच कर माफ़ कर देना चाहिए की उस समय उनकी उम्र कम थी और सहन शक्ति थी | एक इंसान होने के नाते उन्होंने गलती करी | शायद इसके पीछे उनका भी खराब बचपन जिम्मेदार हो | फिर भी जो चीजे उन्होंने बहुत भयानक करीं हैं वो उनका व्यक्तिगत स्वाभाव हो सकता है | जरूरी नहीं की हर पुरुष ऐसा हो | जरूरी नहीं की हर किसी का बचपन असुरक्षा में बीता हो | दुसरे पुरुष को देखने में मुझे  अपने पिता की परछाई से मुक्त होना पड़ेगा |


मेरी माँ ने बहुत कठिन समय देखा | वो भी एक आत्मनिर्भर  महिला थीं | जिनकी वजह से मैं बचपन से आत्मनिर्भर बन सकी | जब बच्चे घंटों माँ के कहने पर किताब उठाते हैं | मुझे पता था मुझे कहने वाला कोई नहीं इसलिए खुद ही अपने होमवर्क का ध्यान  रखना आ गया |  नाश्ता  , खाना समय पर खाना मैं सीख गयी | हां माँ मेरे स्कूल कभी नहीं गयीं इस बात से मुझे ये समझ आया की मुझे अपने बच्चों के साथ उनकी पेरेंट टीचर मीटिंग , अवार्ड फंक्शन , होमवर्क में  जरूर साथ देना चाहिए |
नीलेश को पहचानने में भी मेरी ही गलती थी | मेरा डिसीजन ही गलत था की उसे बिना ठीक से जाने समझे मैंने उससे शादी कर ली | और अपनी  नौकरी ,  घर , बैंक बैलेंस सब छोड़ कर उसके साथ चल दी | दूसरा  गलत डिसीजन मेरा ये था की मैं उसे समझने के बाद भी उसके अत्याचार इस उम्मीद पर सहती रही कि शायद वो बदल जाए | ये एक दिवा स्वप्न ही था | मुझे जल्दी से जल्दी अपनी आत्मा को ज्यादा नुक्सान पहुंचाए उस रिश्ते से निकल जाना चाहिए |

रीता मनोचिक्तिस्क की ओर देख कर बोली , हम इतिहास से सीखते नहीं हैं इस कारण वह बार – बार पलट – पलट कर हमारे सामने आता है | 

 मनोचिकित्सक  ने कहा ,” बिलकुल अब आप सही नतीजे पर पहुंची हैं | जीवन की हर परिस्थिति चाहे वो अच्छी हो या बुरी , सकारातमक हो या नकारात्मक , हमे कुछ सीख सकते हैं और आगे का जीवन सुधार सकते हैं | अब आप अपनी पुरानी  दुःख भरी कहानी सुनाने के साथं पर बार – बार रिपीट करें यह  एक अनुभव था जिससे आप ने बहुत कुछ सीखा है आपकी सोंच व् आपके निर्णय गलत थे आप नहीं | आप एक खुशमिजाज , जिंदादिल  प्यार के काबिल इंसान हैं और ऐसा ही भविष्य में लिखा है |

जब रीता ने खुद को सुनाई जाने वाली कहानी बदली

                                                   
अब रीता की आँखों में अतीत के दर्द नहीं भविष्य के सपने होते थे | वो खुद से कहती जिंदगी के इस सफ़र ने उसे पहले से बेहतर मैच्योर व् खुशकिस्मत बना दिया है | अब वो परिस्थितियों को अच्छे से संभाल  सकती है | कोई कारण नहीं है की अब उसकी जिंदगी में ख़ुशी के रंग न बिखरे |
खुद को सुनाई जाने वाली कहानी बदले  ज्यादा दिन नहीं हुए थे | जब शिरीष उसकी जिंदगी में आये | शिरीष ने ही उसे प्रपोज किया था | आज वो उसके व् अपने बच्चों के साथ खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिता रही है |


क्या करें अगर आप भी खुद को सुनाई जाने वाली कहानी बदलना चाहते हैं

पहले खुद पर गौर करें ............आप अतीत से निकल नहीं पा रहे हैं
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  • अगर आप सबको व् खुद को वही कहानी बार – बार सुनाते हैं
  • आपका सारा ध्यान उस व्यक्ति की तरफ रहता है जिसने आप की जिन्दगी को तकलीफ दी है
  • आप बार – बार महसूस करते हैं कि आप का जीवन “हिस्ट्री रीपीट्स इटसेल्फ” पर चलता है |

अतीत  को भूलने के लिए कैसे बदले जिंदगी  कहानी


सबसे पहले तो मैं ये कहना चाहूंगी कि अगर आप ठान  लें तो कुछ भी कर सकते हैं | इसके लिए निम्नाकित  बातों का ध्यान रखिये .....

  • जब भी दिमाग में अतीत की कहानी शुरू हो पॉज बटन दबा दीजिये | थोड़ी मेडिटेशं प्रैक्टिस से ये संभव है |
  • एक कॉपी पेन ले कर बैठ जाइए | अपनी वो कहानी लिखिए जो आप सबको और खुद को सुनाते हैं | पूरे डिटेल में नहीं बस पॉइंट्स में लिखिए |
  • अब उससे जो  जिस्ट निकल कर आये लिखिए | यानि  जो आप सोंचते है की आपके साथ ऐसा बुरा क्यों हुआ |
  • अब सोंचिये इससे आपने क्या क्या सीखा |
  • सारे इंटरप्रीटेशन बदल कर वो लिखिए जो इसके सुखद नतीजे रहे | मसलन आप में क्या – क्या पॉजिटिव बदलाव आये या आपने क्या – क्या सीखा |
  • अब महसूस करिए की इन सुखद नतीजों के आने से आप कितनी ख़ुशी महसूस कर रहे हैं या आपकी अपने बारे में धरणा  कितनी बदल गयी है |
  • आप अपने उन गुणों को लिखिए जिनके कारण आप पहले से बेहतर हो गए हैं | उन्हें बार – बार पढ़िए फील करिए |
  • मान लीजिये अब आप क्योंकि पहले से बेहतर हो गए हैं इसलिए अब आप बेहतर भाग्य और खुशियाँ डिजर्व करते हैं |

                                         
अगर आप ऐसा खुद से नहीं कर पा रहे हैं तो आप किसी मनो चिकत्सक की सहायता ले सकते हैं |लेकिन ऐसा करने से निश्चित रूप से आप अतीत के दर्द से निकल जायेंगे | ये मत सोंचिये कि इससे  आप का अतीत बदल नहीं जाएगा पर अपने को हर समय विक्टिम न महसूस करके आप वर्तमान  और भविष्य खिल उठेगा |

तो उठाइये पेंन और अतीत से निकलने के लिए बदल दीजिये खुद को सुनाई जाने वाली कहानी |


वंदना बाजपेयी 

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अटूट बंधन : जो अटूट बंधन में बांधे आपके रिश्तों को : अतीत से निकलने के लिए बदलें खुद को सुनाई जाने वाली कहानी
अतीत से निकलने के लिए बदलें खुद को सुनाई जाने वाली कहानी
दुखद अतीत से निकलने के लिए जरूरी है कि हम खुद को सुनाई जाने वाली अतीत की दर्द भरी कहानी को बदल दें |
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