माँ मै दौडूंगा

माँ मै तुम्हारे लिए दौडूंगा जीवन भर आप मेरे लिए दौड़ती रही कभी माँ ने यह नहीं दिखाया कि मै  थकी हूँ  माँ ने …

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कुछ रचनाएँ बीनू भटनागर जी के काव्य संग्रह ” मैं सागर में एक बूँद सही” से

बीनू भटनागर  जी  की कवितायें  भावनाओं का सतत प्रवाह है |  किसी नदी की भांति यह अपना  आकार स्वयं  गढ़  लेती हैं …

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बदलते हुए गाँव

गाँव यानि अपनी मिटटी , अपनी संस्कृति और अपनी जडें , परन्तु विकास की आंधी इन गाँवों को लीलती जा …

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पतंगें

हम सब ने पतंगे आसमान  में उड़ाई हैं | बड़ा ही मनोरंजक खेल हैं | पर यहाँ मैंने पतंग को …

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जल जीवन है

अखिल सृष्टि में जल जीवन है जीवन का सम्मान करो संरक्षित कर स्वच्छ सलिल को धरती में मुस्कान भरो जिस …

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सुहागरात (कविता )

यूँही पड़ी रहने दो कुछ दिन और कमरे मे— हमारे सुहागरात की बिस्तर और उसकी सिलवटे। मोगरे के अलसाये व …

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