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Monthly Archives: June 2017

“नज़रे बदलो नज़ारे बदल जायेंगे” आपकीसोच जीवन बना भी सकती है बिगाढ़ भी सकती...

पंकज प्रखर,  सकारात्मक सोच व्यक्ति को उस लक्ष्य तक पहुंचा देती है जिसे वो वास्तव में प्राप्त करना चाहता है लेकिन उसके लिए एक दृण सकारात्मक सोच...

जनसेवा के क्षेत्र में रोल माॅडल बनीं पुष्पा पाल

प्रस्तुति - प्रदीप कुमार सिंह अम्बेडकर नगर: महिलाओं व बच्चों के हित में कार्य करने के लिए रोल माॅडल के रूप में उभरी हैं अकबरपुर तहसील...

आईये हम लंठो को पास करते है ( व्यंग्य )

-रंगनाथ द्विवेदी अब इस देश मे वे दिन नही जब हम अन्य विज्ञापनो की भांति ही ये विज्ञापन भी अपने टेलीविजन या अखबारो मे...

पढ़ाई के लिए छोड़ना पड़ा घर 16 फ्रैक्चर, 8 सर्जरी के बाद भी आईएएस...

     राजस्थान के पाली मारवाड़ में जन्मी उम्मुल की मां बहुत बीमार रहती थीं। पापा उन्हें छोड़कर दिल्ली आ गए। मां ने कुछ दिन तो...

एंजिलिना जोली सिंड्रोम – सेहत के जूनून की हद

एक आम घर का दृश्य देखिये | पूरा परिवार खाने की मेज पर बैठा है | सब्जी रायता , चपाती , गाज़र का हलवा...

जो मिला नहीं उसे भूल जा

सीताराम गुप्तादिल्ली दुखों से बचने के लिए जीवन के बायोडाटा में सिर्फ़ उसे शुमार करें जो आज आपके पास हैउर्दू शायर अमजद इस्लाम ‘अमजद’ की...

फेसबुक और महिला लेखन

कितनी कवितायें  भाप बन  कर उड़ गयी थी  उबलती चाय के साथ  कितनी मिल गयी आपस में  मसालदान में  नमक मिर्च के साथ  कितनी फटकार कर सुखा दी गयी  गीले...

काश, मेरे मुल्क में भी शांति होती- मुजून अलमेलहन, यूएन की गुडविल अंबेसडर

            मुजून सीरिया के शहर डारा में पली-पढ़ीं। पापा स्कूल टीचर थे। उन्होंने अपने चारों बच्चों (दो बेटे और दो बेटियों) की पढ़ाई को सबसे ज्यादा...

नहीं पता था मेरी जिद सुर्खियों में छाएगी – प्रियंका भारती, सामाजिक कार्यकर्ता

             प्रियंका तब 14 साल की थीं। यह बात 2007 की है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली...

तुफानों का गजब मंजर नहीं है

सुशील यादव 122२  1222 १22 तुफानों का गजब मंजर नहीं है इसीलिए खौफ में ये शहर नहीं है तलाश आया हूँ मंजिलो के ठिकाने कहीं मील का अजी पत्थर...

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