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archana anupriya

आत्मनिर्भरता- कितनी जरूरी

  अंग्रेजी में एक कहावत है- "God helps those,who help themselves"यानि, ईश्वर भी उसी की मदद करता है जो अपनी मदद खुद कर सकता है। अंग्रेजी की यह कहावत आत्मनिर्भरता की संकल्पना सामने लाती है।...
ऐ सुनो

ऐ, सुनो ! मैं तुम्हारी तरह

पितृसत्ता की लड़ाई स्त्री और पुरुष की लड़ाई नहीं है ,ये उस सोच की लड़ाई है जो स्त्री को पुरुष से कमतर मान कर स्वामी और दासी भाव पैदा करती है |कई बार आज...
आशा सिंह

ढोंगी

श्राद्ध पक्ष के दिन चल रहे हैं |हम सब अपने अपने हिसाब से अपने पित्रों के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे है | लेकिन अगर श्रद्धा न हो तो सब कुछ मात्र ढोंग रह...
mahima shree

व्यष्टि से समष्टि की ओर

    ये दौर भी बीत जाएगा। परिवर्तन प्रकृति का मूल स्वभाव है। यहाँ कुछ भी स्थाई नहीं है । मनुष्य अपने आविष्कारों के दंभ में सोचता है कि उसने प्रकृति पर विजय पा ली है।...
गुज़रे हुए लम्हे

गुजरे हुए लम्हे (परिशिष्ट)-अध्याय 15

  आत्मकथा लेखन में ईमानदारी की बहुत जरूरत होती है क्योंकि खुद के सत्य को उजागर करने के लिए साहस चाहिए साथ ही इसमें लेखक को कल्पना को विस्तार नहीं मिल पाता | उसे कहना...
यात्रा वृत्त

गुज़रे हुए लम्हे -अध्याय -14

  आत्मकथा लेखन में ईमानदारी की बहुत जरूरत होती है क्योंकि खुद के सत्य को उजागर करने के लिए साहस चाहिए साथ ही इसमें लेखक को कल्पना को विस्तार नहीं मिल पाता | उसे कहना...
गुज़रे हुए लम्हे -अध्याय 13 -कभी ख़ुशी कभी ग़म

गुज़रे हुए लम्हे -अध्याय 13

आत्मकथा लेखन में ईमानदारी की बहुत जरूरत होती है क्योंकि खुद के सत्य को उजागर करने के लिए साहस चाहिए साथ ही इसमें लेखक को कल्पना को विस्तार नहीं मिल पाता | उसे कहना...
गुज़रे हुए लम्हे-अध्याय 13-साहित्यिक गतिविधियाँ

गुज़रे हुए लम्हे -अध्याय 12

    आत्मकथा लेखन में ईमानदारी की बहुत जरूरत होती है क्योंकि खुद के सत्य को उजागर करने के लिए साहस चाहिए साथ ही इसमें लेखक को कल्पना को विस्तार नहीं मिल पाता | उसे कहना...
6 साल के बच्चे का अपने सैनिक पिता को फोन.....

6 साल के बच्चे का अपने सैनिक पिता को फोन…..

आज हम जिस स्वतंत्रता का उत्सव मना  रहे हैं उसके पीछे ना जाने कितने लोगों का बलिदान है |आज भी जब हम घर में चैन  से सोते हैं तो क्या सोचते हैं कि कोई...
गुज़रे हुए लम्हे

गुज़रे हुए लम्हे -अध्याय 11

  आत्मकथा लेखन में ईमानदारी की बहुत जरूरत होती है क्योंकि खुद के सत्य को उजागर करने के लिए साहस चाहिए साथ ही इसमें लेखक को कल्पना को विस्तार नहीं मिल पाता | उसे कहना...